फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०८ फलदीपिका यदि मेष लग्न या मेष राशि हो (जन्म के समय मेष लग्न उदित हो या मेष राशि में चन्द्रमा हो) तो जातक की गोल आंखें होती हैं, उसके घुटने कमज़ोर होते हैं, वह उग्र प्रकृति का होता है, किन्तु जल से डरता है। ऐसा व्यकि चपल और घूमने का शौकीन होता है उसके शरीर में व्रण का चिन्ह होता है। ऐसे व्यक्ति कामी होते हैं किन्तु भोजन थोड़ा करते हैं। ऐसे व्यक्ति मिथ्याभाषी भी होते हैं। ॥१॥ यदि जातक का वृष लग्न हो या जन्म के समय चन्द्रमा वृष राशि में हो तो चेहरा और जांघें बड़ी होती हैं। जातक कृषि कर्म करने वाला होता है। यदि उसके जीवन को तीन भागों में बांटा जाय तो अन्तिम दो भाग सुख से व्यतीत होते हैं। ऐसा व्यक्ति प्रमदाप्रिय (स्त्रियों का शौकीन), त्यागी क्षमावान्, क्लेश सहने वाला (परिश्रमी) होता है। ऐसे व्यक्ति गोधन (गाय, बैल आदि) से युक्त होते हैं। किन्तु जातक के पीठ में, चेहरे पर, या बगल में निशान होता है— मस्से, लहसन का या व्रण का । ॥ २ ॥ यदि जन्म के समय मिथुन राशि का चन्द्रमा हो या मिथुन लग्न उदित हो तो जातक के नेत्र काले होते हैं और बाल घुंघराले। ऐसे जातक स्त्री-विलास में बहुत अनुरक्त रहते हैं परन्तु बुद्धिमान् होते हैं और दूसरे की मन्शा समझ लेते हैं। इनकी नाक ऊंची होती है, और नाच गान के शौकीन होते हैं। ऐसे लोग अपने मकान में (कमरे के अन्दर) ही रहना ज्यादा पसन्द करते हैं अर्थात् मकान के बाहर मेष लग्न वालों की तरह इन्हें भ्रमण पसन्द नहीं। ॥३ ॥ यदि जातक की कर्क राशि हो या जन्म के समय कर्क लग्न हो तो जातक स्त्रीनिर्जित (स्त्रियों से जीता हुआ या स्त्रियों के वशीभूत) स्थूल गले वाला और मित्रवान् होता है। ऐसे जातक के स्वयं के कई मकान होते हैं और धनाढ्य होता है। उसकी कमर मोटी होती है किन्तु कद ऊँचा नहीं होता। ऐसा जातक बुद्धिमान् और जलविहार का शौकीन होता है। वह शीघ्र चलने वाला होता है। उसके पुत्र थोड़े