भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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२१० फलदीपिका धारण करने वाले अर्थात् उच्चाधिकारी होते हैं । ॥ ८ ॥ जिनके जन्म के समय धनु लग्न हो या धनु राशि में चन्द्रमा हो उनकी नाक, कान, चेहरे और कण्ठ बड़े होते है। ऐसे व्यक्ति किसी न किसी कार्य में लगे रहते हैं अर्थात् निठल्ले नहीं बैठते। बोलने में बहुत प्रगल्भ और त्यागी होते हैं। इनका कद बहुत ऊंचा नही होता। या कुछ झुक कर चलते हैं। ये लोग साहसी होते हैं और अपने शत्रुओं को पछाड़ देते हैं। ये लोग बलाढ्य और राजा के प्यारे भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति को समझा कर ही अपने वश में किया जा सकता है। उनसे कोई काम कराना हो तो वश करने के जो चार साधन* हैं उनमें से केवल "साम" से, उनसे कार्य कराया जा सकता है। जिनका मकर लग्न हो या जन्म के समय चन्द्रमा मकर राशि में हो उनके शरीर के नीचे का भाग अर्थात् (कमर से पैर तक) कृश होता है। किन्तु ऐसे व्यक्ति में सत्व (शारीरिक, मानसिक तथा आत्मिक शक्ति) काफी होती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की वातमानते हैं किन्तु स्वभाव से आलसी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का सम्बन्ध किसी अधिक वयवाली अगम्या स्त्री से होता है। ऐसा व्यक्ति धर्मध्वज होता है अर्थात् उसका बाहरी आवरण बहुत धार्मिकता का होता है। वह घूमने का शौकीन और भाग्यवान् किन्तु लज्जाहीन होता है। मकर लग्न या मकर-चन्द्र के जातक वात रोग से पीड़ित होते हैं। ॥ १० ॥ अब कुंभ लग्न वाले या जिनके जन्म के समय चन्द्रमा कुंभ राशि में हो उनका फल बताते हैं। ऐसे व्यक्ति छिपकर पाप करने वाले, थोड़े द्रव्य वाले, लोभी, दूसरे के धन के इच्छुक, मार्ग चलने का परिश्रम सहन करने वाले और दूसरों को चोट पहुंचाने मे दक्ष होते हैं। इनका शरीर भी घड़े के आकार का होता है। पुष्पों के और सुगन्धित द्रव्यों के ये शौकीन होते हैं। कभी यह क्षय को प्राप्त साम, दान, दण्ड, भेद ।