भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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तेरहवाँ अध्याय : आयुर्भाव २५५ चन्द्रमा यदि केन्द्र या अष्टम में हो और मृत्यु भाग में हो तो भी बालक की शीघ्र मृत्यु होती है। किस राशि में किस अंश में चन्द्रमा और लग्न मृत्यु भाग में होता है यह आगे के दो श्लोकों में बताया गया है। चान्द्रं रूपं लोकशूरो वरज्ञः कुड्यं चित्रं भाग्यलोके मुखानाम्। मेने राज्यं मृत्युभागाः प्रदिष्टा मेषादीनां वर्णसंख्यैर्हिमांशोः ॥१०॥ दानं धेनो रुद्र रौद्री मुखेन भाग्या भानुर्गोत्र जाया नखेन। पुत्री नित्यं मृत्युभागाः क्रमेण मेषादीनां तेषु जातो गतायुः ॥११॥ किस राशि में किन-किन अंशों पर रहने से चन्द्रमा या लग्न मृत्यु भाग में कहलाता हैं यह नीचे के चक्र से स्पष्ट होगा। चन्द्रमा का लग्न : अंश अंश मेष २६ ८ वृष १२ ९ मिथुन १३ २२ कर्क २५ २२ सिंह २४ २५ कन्या ११ १४ तुला २६ ४ वृश्चिक १४ २३