फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८४ फलदीपिका (२) यदि यह दोनों (नवम और पंचम के मालिक) समान बली हों तो पूर्वजन्म और पुनर्जन्म एक ही जाति में था और होगा (३) पूर्व जन्म का हाल नवमेश के वर्ण, गुण आदि जो विविध ग्रहों के प्रथम अध्याय में बताये गये हैं उनके अनुसार बताना चाहिये, तथा पुनर्जन्म का विवरण पंचमेश के वर्ण, गुण आदि के अनुसार कहना चाहिये । ग्रहों के स्वरूप, जाति, प्रकृति, स्वभाव आदि पहिले संज्ञाध्याय में बता चुके हैं। ।।२७।। २१ श्लोक से २९ श्लोक तक पूर्व जन्म और पुनर्जन्म का हाल जानने के सिद्धान्त दिये गये है । व्यावहारिक दृष्टि से इनकी उपयो- गिता कुछ नहीं है । शास्त्रीय दृष्टि से यह दिलचस्प प्रकरण है । कर्म विपाक नामक एक ग्रंथ में पूर्व जन्म का विशेष विवरण जानने के लिये विस्तार पूर्वक फला देश दिया गया है । परन्तु यह कहा नहीं जा सकता कि कहाँ तक वह ठीक है क्यों कि इसका निश्चय करने का कोई साधन नहीं कि कहाँ तक यह फल ठीक बैठते हैं ।।२९।।