फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसत्रहवाँ अध्याय : निर्याणप्रकरण ३२७ (ii) धूम आदि पांचों उपग्रहों को जोड़िये। जोड़ने से जो राशि और द्रेष्काण आवे उस पर जब गोचरवश शनि आता है तो जातक की मृत्यु हो सकती है। ॥१०॥ विलग्नमान्दिस्फुटयोगभांशं निर्याणमासं प्रवदन्ति तज्ज्ञाः । निर्याणचन्द्रो गुलिकेन्दुयोगो लग्नं विलग्नार्किसुतेन्दुयोगः ॥११॥ (i) लग्न स्पष्ट और मान्दि-स्पष्ट को जोड़िये, जो योग आवे वह मृत्यु का मास हुआ अर्थात् उस राशि में जब सूर्य आवेगा तब जातक की मृत्यु होगी। (ii) मान्दि स्पष्ट और चन्द्र स्पष्ट को जोड़िये, जो राशि आवे उस राशि पर मृत्यु के समय चन्द्रमा होगा । (iii) लग्न स्पष्ट, मान्दि-स्पष्ट और चन्द्र स्पष्ट को जोड़िये । जो योग आवे वह मृत्यु के समय लग्न होगा । ॥११॥ मान्दिस्फुटोदितनवांशगतेऽमरज्ये तद्द्वादशांशसहिते दिननाथसूनौ । द्रेष्काणकोणभवने दिनपे च मृत्यु र्लग्नेन्दुमान्दियुतभेशगतोदये स्यात् ॥१२॥ यह देखिये कि मान्दि किस नवांश में है। इस नवांश में जब बृहस्पति आवे; यह देखिये कि मान्दि किस द्वादशांश में है; इस द्वादशांश में जब शनि आवे; और मान्दि किस द्रेष्काण में है, उस द्रेष्काण में या उनसे नवमपंचम जब गोचरवश सूर्य आवे तब जातक