फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउन्नीसवाँ अध्याय : दशाफल ३८३ २. यदि शुक्र बारहवें घर में हो तो योग देने वाला नहीं होता । ३. यदि लग्न में सूर्य और शुक्र हों और दशम में राहु हो, तो राहु और बृहस्पति की दशा में योग होता है। ४. यदि सूर्य और मंगल अष्टम में हों तो उनकी दशा में दुःख होगा । बुध की दशा योग देने वाली होती है । ५-६. यदि वृहस्पति लग्न में हो और शनि दूसरे घर में हो तो बृहस्पति की दशा में मिश्र फल होगा यानी मिला-जुला फल होगा यानी कभी अच्छा कभी ख़राब; कुछ अच्छा; कुछ ख़राब । शनि की दशा योग देने वाली होगी। ७. यदि शनि और शुक्र धनु राशि के लाभ स्थान में हों तो शुक्र की दशा योग देने वाली होगी । ८. यदि सूर्य, बुध और बृहस्पति तृतीय में हो तो सूर्य की दशा शुभ-राज योग कारक होती है । मीन लग्न विचार अब मीन लग्न वाले जातकों का विचार दिया जाता है :-- १. यदि जन्म लग्न मीन या कुंभ हो और शुक्र १२वें घर में हो तो शुक्र योग देने वाला नहीं होता । यदि कोई अन्य लग्न जन्म कुण्डली में हो तो बारहवें घर में शुक्र अच्छा फल करता है । २. (क)* बारहवें घर में शनि हो तो योग देने वाला होता है । यदि चन्द्रमा बारहवें घर में हो तो जातक धनहीन होता है । नोट-*यहाँ पर यह अर्थ समझना चाहिये कि मीन लग्न वाली कुण्डली में शनि बारहवें घर में योग देने वाला होता है। बहुत सी जगह यह पुनरावृत्ति नहीं की गई है । कि "यदि अमुक लग्न हो" किन्तु यह देखना चाहिये कि किस लग्न के अन्तर्गत यह योग दिया गया है । उसी लग्न में ऊपर लिखे हुये योग घटाने चाहियें । सब लग्नों में नहीं ।