फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५२ फलदीपिका महादशा में अन्तर्दशाकाल त्रैराशिक से निकालना चाहिये। उदाहरण के लिये आपको यह निकालना है कि शुक्र की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा कितने समय की होगी तो निम्नलिखित तरीके से निकालिये। यदि १२० वर्ष में सूर्य का भाग ६ वर्ष तो १ ,, ,, ,, ६ × १/१२० वर्ष तो २० ,, ,, ,, ६/१२० × २० = १ वर्ष सूर्य की महादशा ६ वर्ष की होती है और शुक्र की महादशा २० वर्ष की इसलिये २० और ६ की संख्या ऊपर ली गयी है। जिस प्रकार त्रैराशिक से महादशा में अन्तर्दशा निकालते हैं, उसी प्रकार अन्तर्दशा में त्रैराशिक से प्रत्यन्तर्दशा निकाली जाती है। ऊपर हम बता चुके हैं कि शुक्र की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा १ वर्ष की आयी। अब सूर्य की एक वर्ष की अन्तर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा कितने दिन का होगा ? १२० वर्ष में ६ वर्ष १ वर्ष में ६/१२० वर्ष = १/२० वर्ष = १/२० × ३६० दिन = १८ दिन इस प्रकार शुक्र की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा का समय आया १८ दिन। ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा तथा प्रत्यन्तर्दशा की सारिणी पंचांगों में दी रहती है इसलिये यहां नहीं दी जा रही है। महीश्वरादुपलभतेऽधिकं यशो वनाचलस्थलवसतिं धनागमम् । ज्वरोष्णरुग्जनकवियोगजं भयं निजां दशां प्रविशति तीक्ष्णदीधितौ ॥३॥