फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५१४ फलदीपिका चन्द्र १०० वर्ष ८५ वर्ष ८३ वर्ष ८६ वर्ष कला .२१ १०- ६- ० ८-११- ३ ८- ८-१७ ९- ०-११ २२ ११- ०- ० ९- ४- ६ ९- १-१७ ९- ५-१६ २३ ११- ६- ० ९- ९- ९ ९- ६-१६ ९-१०-२० २४ १२- ०- ० १०- २-१२ ९-११-१६ १०- ३-२५ २५ १२- ६- ० १०- ७-१५ १०- ४-१५ १०- ९- ० नोट :—जहाँ आधे से अधिक दिन अर्थात् ३० घड़ी से अधिक आया है उसको १ दिन मान लिया गया है और जहाँ आधे दिन से कम अर्थात् ३० घड़ी से कम समय आया है--उन दिनों को छोड़ दिया गया है। उदाहरण : मान लीजिये किसी का स्पष्ट चन्द्र ११-२०-३९ है। अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा मीन राशि के २० अंश ३९ कला पर था। यह रेवती नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ । देखिये सारिणी 'क' । रेवती द्वितीय चरण की परमायु ८५ वर्ष है । ८५ वर्ष वाली सारिणी न० २ में देखिये । यह सारिणी पुस्तक के अन्त में दी गई है। व. मा. दि ११-२०-२५ की भोग्य दशा ७४-४-१५ है ११-२०-५० की भोग्य दशा ६३-९- ० हमें ११-२०-३९ की भोग्य दशा निकालनी है। अब चाहे ११-२०-२५ में से (३९-२५ = १४) चौदह कला का मान निकाल दीजिये, चाहे ११-२०-५० में (५०-३९ = ११) ग्यारह कला का मान जोड़िये—भोग्य दशा निकल आवेगी ।