भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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पृष्ठ 518

बाईसवां अध्याय : मिश्रदशा ५१७ देह राशि वृष जीवराशि मिथुन देहाधिप शुक्र जीवाधिप बुध वृष शुक्र १६-०-० मेष मंगल ७-०-०

९१-५-३ यह दशाक्रम आया । अन्तर्दशा मानलीजिये आपको वृश्चिक मंगल में अन्तर्दशा लगाना है । यह १ वर्ष ५ मास ३ दिन की आयु पर लगी । अन्तर्दशाचक्र समय उम्र तक व. मा. दि. व. मा. दि. मीन बृहस्पति १-५- ३ १-५- ३ वृश्चिक मंगल में वृश्चिक मंगल ०-६-२७ २-०- ० वृश्चिक मंगल में तुलाशुक्र १-३-२४ ३-३-२४ ,, ,, कन्या बुध ०-८-२७ ४-०-२१ ,, ,, कर्क-चन्द्र १-८-२३ ५-९-१४ ,, ,, सिंह-सूर्य ०-४-२८ ६-२-१२ ,, ,, मिथुन-बुध ०-८-२७ ६-११-९ ,, ,, मकर-शनि ०-३-२९ ७-३-८ ,, ,, कुंभ-शनि ०-३-२९ ७-७-७ ,, ,, मीन-बृहस्पति ०-९-२६ ८-५-३