भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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तीसरा अध्याय : वर्ग विभाग ५९ मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ इन छः विषम राशियों में सोलह भागों के स्वामी (१) ब्रह्मा, (२) विष्णु, (३) हर, (४) सूर्य, (५) ब्रह्मा, (६) विष्णु, (७) हर, (८) सूर्य, (९) ब्रह्मा, (१०) विष्णु, (११) हर, (१२) सूर्य, (१३) ब्रह्मा, (१४) विष्णु, (१५) हर, (१६) सूर्य होते हैं। वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन इन छः सम राशियों में १६ भागों के स्वामी (१) सूर्य, (२) हर, (३) विष्णु, (४) ब्रह्मा, (५) सूर्य, (६) हर, (७) विष्णु, (८) ब्रह्मा, (९) सूर्य, (१०) हर, (११) विष्णु, (१२) ब्रह्मा, (१३) सूर्य, (१४) हर, (१५) विष्णु, (१६) ब्रह्मा होते हैं। त्रिंशांश का अर्थ है तीस भाग, किन्तु प्रचलित प्रथा यह है कि एक राशि के पांच हिस्से करते हैं। विषम राशियों में (मे० मि०,सिं०, तु०,ध०, कुं०) में प्रथम भाग ५ अंश तक, दूसरा १० अंश तक तीसरा १८ अंश तक, चौथा २५ अंश तक, पांचवां ३० अंश तक होता है। सम (वृ०, क०, क०, वृ०, म०, मी०) राशियों में प्रथम विभाग ५ अंश तक, दूसरा १२ अंश तक, तीसरा २० अंश तक, चौथा २५ अंश तक, पांचवां ३० अंश तक होता है। त्रिंशांश चक्र नीचे दिया जाता है। जिससे यह स्पष्ट होगा कि किस राशि में कितने अंश तक त्रिंशांश वर्ग कौन-सा होगा। त्रिंशांश विषम (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ) राशियों में प्रथम भाग ५ अंश तक, दूसरा भाग १० अंश तक, तीसरा १८ अंश तक चौथा २५ अंश तक, पांचवां ३० अंश तक होता है। सम (वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) राशियों में प्रथम भाग ५ अंश तक, दूसरा भाग १२ अंश तक, तीसरा २० अंश तक, चौथा २५ अंश तक, पांचवां ३० अंश तक होता है।