भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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स्पष्टचन्द्र से भोग्य काल चक्र दशा निकालने की सारिणी नं. ३ पूर्ण आयु ८३ वर्ष

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नक्षत्र चरणस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रस्पष्ट चन्द्रयदि १० कोष्ठ वाला स्पष्ट चन्द्र स्पष्ट ही तो अन्य सारिणी देखिये जिसमें यह चन्द्र स्पष्ट कोष्ठ २ में हो।
अश्विनी तृ० च००- ६-४००- ७- ५०- ७-३००- ७-५५०- ८-२००- ८-४५०- ९-१००- ९-३५०-१०- ०
भरणी ,,०-२०- ००-२०-२५०-२०-५००-२१-१५०-२१-४००-२२- ५०-२२-३००-२२-५५०-२३-२०
कृत्तिका ,,१- ३-२०१- ३-४५१- ४-१०१- ४-३५१- ५- ०१- ५-२५१- ५-५०१- ६-१५१- ६-४०
रोहिणी द्वि० च०१-१३-२०१-१३-४५१-१४-१०१-१४-३५१-१५- ०१-१५-२५१-१५-५०१-१६-१५१-१६-४०
मृगशिर ,,१-२६-४०१-२७- ५१-२७-३०१-२७-५५१-२८-२०१-२८-४५१-२९-१०१-२९-३५२- ०- ०
आर्द्रा ,,२-१०- ०२-१०-२५२-१०-५०२-११-१५२-११-४०२-१२- ५२-१२-३०२-१२-५५२-१३-२०
पुनर्वसु तृ० च०२-२६-४०२-२७- ५२-२७-३०२-२७-५५२-२८-२०२-२८-४५२-२९-१०२-२९-३५३- ०- ०
पुष्य ,,३-१०- ०३-१०-२५३-१०-५०३-११-१५३-११-४०३-१२- ५३-१२-३०३-१२-५५३-