फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished684 पृष्ठ
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स्पष्टचन्द्र से भोग्य काल चक्र दशा निकालने की सारिणी नं. ३ पूर्ण आयु ८३ वर्ष
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| नक्षत्र चरण | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | स्पष्ट चन्द्र | यदि १० कोष्ठ वाला स्पष्ट चन्द्र स्पष्ट ही तो अन्य सारिणी देखिये जिसमें यह चन्द्र स्पष्ट कोष्ठ २ में हो। |
| अश्विनी तृ० च० | ०- ६-४० | ०- ७- ५ | ०- ७-३० | ०- ७-५५ | ०- ८-२० | ०- ८-४५ | ०- ९-१० | ०- ९-३५ | ०-१०- ० | |
| भरणी ,, | ०-२०- ० | ०-२०-२५ | ०-२०-५० | ०-२१-१५ | ०-२१-४० | ०-२२- ५ | ०-२२-३० | ०-२२-५५ | ०-२३-२० | |
| कृत्तिका ,, | १- ३-२० | १- ३-४५ | १- ४-१० | १- ४-३५ | १- ५- ० | १- ५-२५ | १- ५-५० | १- ६-१५ | १- ६-४० | |
| रोहिणी द्वि० च० | १-१३-२० | १-१३-४५ | १-१४-१० | १-१४-३५ | १-१५- ० | १-१५-२५ | १-१५-५० | १-१६-१५ | १-१६-४० | |
| मृगशिर ,, | १-२६-४० | १-२७- ५ | १-२७-३० | १-२७-५५ | १-२८-२० | १-२८-४५ | १-२९-१० | १-२९-३५ | २- ०- ० | |
| आर्द्रा ,, | २-१०- ० | २-१०-२५ | २-१०-५० | २-११-१५ | २-११-४० | २-१२- ५ | २-१२-३० | २-१२-५५ | २-१३-२० | |
| पुनर्वसु तृ० च० | २-२६-४० | २-२७- ५ | २-२७-३० | २-२७-५५ | २-२८-२० | २-२८-४५ | २-२९-१० | २-२९-३५ | ३- ०- ० | |
| पुष्य ,, | ३-१०- ० | ३-१०-२५ | ३-१०-५० | ३-११-१५ | ३-११-४० | ३-१२- ५ | ३-१२-३० | ३-१२-५५ | ३- |