प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)
Prabandha Chintamani with Hindi Translation
मेरुतुङ्गाचार्य (१३०४ ई.) / पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा
DevanagariHindipublished181 पृष्ठ
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१२० ] प्रबन्धचिन्तामणि [ चतुर्थ प्रकाश [ १४५ ] जिसके काटे हुए म्लेच्छ कपालके स्थलकी ऊचाईको देखता हुआ अर्बुद गिरि अपने पिता प्रालेयगिरि (हिमालय) की याद भूल जाता है । [ १४६ ] विधाताके, उस कल्पद्रुमके अङ्कुरको शीघ्र ही नष्ट करनेके बाद, उसका छोटा भाई श्रीभीम नामक [ नया ] पौधा उगा। * १८०) स० १२३३ से ले कर [ १२९६ तक ] ६३ वर्ष श्री भीम देव ने राज्य किया । [ १४७ ] यह भीम राजा, जो राजहंसोंका दमन करने वाला है कदापि उस भीमसेन के समान नहीं कहा जाता जो बकापकारी ( बकासुरका नाश करने वाला ) था । यह राजा जब राज्य कर रहा था तो सोहड नामक मालव देश का राजा गूर्जर देश को विध्वंस करनेके लिये सीमांत पर आया । तब इसके प्रधानने सामने जा कर इस प्रकार कहा— २१२. हे राजन्सूर्य (तुम्हारा) प्रताप पूर्व [दिशा] में ही शोभित होता है । पश्चिम दिशामें आने पर तुम्हारा वह प्रताप अस्त हो जाता है * । इस विरुद्ध वाणीको सुन कर वह वापस लौट गया । इसके बाद उसने अपने लड़केसे, जिसका नाम श्रीमान् अर्जुन देव था, गूर्जर देश का भंग कराया । * वीरधवलका प्रादुर्भाव । १८१) श्री भीम देव के राज्यकी चिन्ता करने वाले (राज्य व्यवस्था सम्हालने वाला) व्याघ्रपल्ली य नामसे प्रसिद्ध श्रीमान् आणाक का पुत्र लवण प्रसाद चिरकाल तक राज्य करता रहा। साम्राज्यके भारको धारण करने वाला उसका पुत्र हुआ श्री वीर धवल । उसकी माता मदन राज्ञीने, अपनी बहनकी मृत्युके बाद यह सुनकर कि-अपने देवराज नामक पट्टैल (पटल) बहनोई जिसकी बडी भारी आमदनी है लेकिन अब जिसका निभार नहीं हो रहा है, राना लवणप्रसाद से पूछ कर अपने शिशुपुत्र वीर धवलको साथ ले कर वहाँ गई। उस बहनोईने उसके गुण और आकृतिको स्पृहणीय देख कर, उसे अपनी ही गृहिणी बना लिया । लवण प्रसाद ने जो यह वृत्तान्त सुना, तो उसे मार डालनेके लिये रातको उसके घरमें घुसा और एकांतमें छिप कर जब वह अवसर खोज रहा था, तब वह पटेल भोजन करनेके लिये बैठा और [पासमें वीरधवलको न देख कर अपनी गृहिणीसे ] यह कहने लगा कि वीर धवल के बिना मैं नहीं खाऊगा । इस तरह खूब आग्रहके बाद उसे ले आ कर एक ही थालीमें उसके साथ खाने लगा । तब अकस्मात्, साक्षात् कृतान्तकी तरह सामने उपस्थित उस आदमीको देख भयसे उसका मुह फाला हो गया। पर उस (लवणप्रसाद) ने कहा कि -' मत डरो, मैं तुम्हीं को मारने आया था पर इस मेरे वीरधवल लड़के पर, तुम्हारी ऐसी सरलता अपनी साक्षात् आँखोंसे देख कर, उस आग्रहको मैंने त्याग दिया है।' ऐसा कह कर उसके द्वारा सत्कृत हो कर जैस आया था वैसे ही चला गया । १८२) वीर धवल के उस अपर पितासे डापल, साँगण, चामुण्डराज आदि राष्ट्रकूटवंशीय भाई हुए जो अपने वीर व्रतसे गुजरातमें प्रख्यात हुए ।
- मालवासे गुजरात पश्चिम दिशामें है इस लिये इस श्लोकमें यह सूचित दिया गया है कि मालवाका राजा यदि गुजरातमें आयगा तो उसका तेज नष्ट हो जायगा।