भारतकोश
प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

Prabandha Chintamani with Hindi Translation

मेरुतुङ्गाचार्य (१३०४ ई.) / पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा

DevanagariHindipublished181 पृष्ठ

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सिंघी जैन ग्रन्थमाला जैन आगमिक, दार्शनिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक, कथात्मक-इत्यादि विविधविषयगुम्फित प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश, प्राचीनगूर्जर, राजस्थानी आदि नाना भाषानिबद्ध बहु उपयुक्त पुरातनवाङ्मय तथा नवीन संशोधनात्मक साहित्यप्रकाशिनी जैन ग्रन्थावलि । कलकत्तानिवासी स्वर्गस्थ श्रीमद् डालचन्दजी सिंघी की पुण्यस्मृतिनिमित्त तत्सुपुत्र श्रीमान् बहादुरसिंहजी सिंघी कर्तृक संस्थापित तथा प्रकाशित संपादक तथा सञ्चालक जिन विजय मुनि [ सम्मान्य सभासद-भाण्डारकर प्राच्यविद्या संशोधन मन्दिर पूना, तथा गुजरात साहित्यसभा अहमदाबाद; भूतपूर्वाचार्य-गुजरात पुरातत्त्वमन्दिर अहमदाबाद; जैनवाङ्मयाध्यापक विश्वभारती, शान्तिनिकेतन; पुरातत्त्वादि-प्रधानाध्यापक भारतीय विद्या भवन बंबई, तथा, जैन साहित्यसंशोधक ग्रन्थावलि- पुरातत्त्वमन्दिर ग्रन्थावलि-भारतीय विद्या ग्रन्थावलि-अन्तर्गत संस्कृत-प्राकृत-पाली- अपभ्रंश-प्राचीनगूर्जर-हिन्दी-आदि भाषामय अनेकानेक ग्रन्थ संशोधक-सम्पादक । ] ग्रन्थांक ३ प्राप्तिस्थान व्यवस्थापक - सिंघी जैन ग्रन्थमाला अनेकान्त विहार, ९, शान्तिनगर; पो० साबरमती, अहमदाबाद } ☞ { सिंघी सदन, ४८, गरियाहाट रोड; पो० बालीगंज, कलकत्ता स्थापनाब्द ] सर्वाधिकार सुरक्षित [ वि० सं० १९८६