भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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देह-निन्दा है ?' ऐसा विचार करते रहनेसे अहंता और ममता निवृत्त हो जाती हैं । स्त्रीपुंसोः संयोगात्सम्पाते शुक्रशोणितयोः । प्रविशञ्जीवः शनकैः स्वकर्मणा देहमाधत्ते ॥ ८ ॥ स्त्री और पुरुषके संयोगसे रज और वीर्यका मेल होनेपर जीव अपने कर्मानुसार गर्भमें प्रवेश करके धीरे-धीरे देह धारण करता है । मातृगुरूदरदर्यां कफमूत्रपुरीषपूर्णायाम् । जठराग्निज्वालाभिर्नवमासं पच्यते जन्तुः ॥ ९ ॥ फिर नौ मासतक मल-मूत्र और कफादिसे पूर्ण माताकी कोखरूप बड़ी भारी कन्दरामें पड़ा हुआ यह जीव जठरानलकी ज्वालाओंसे जला करता है । दैवात्प्रसूतिसमये शिशुस्तिरश्चीनतां यदा याति । शस्त्रैर्विखण्ड्य स तदा बहिरिहनिष्कास्यतेऽतिबलात् ॥ प्रसवके समय यदि दैववश बालक टेढ़ा हो जाता है तो उसे शस्त्रोंसे काट-काटकर अति बलपूर्वक बाहर निकाला जाता है । अथवा यन्त्रच्छिद्रायदा तु निःसार्यते प्रबलैः । प्रसवसमीरैश्च तदा यः क्लेशः सोऽप्यनिर्वाच्यः॥११॥ अथवा यदि ठीक-ठीक प्रसव भी हुआ तो जिस समय वह ३