भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 86 में से

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प्रबोधसुधाकर एक दिन जब श्रीकृष्णचन्द्र यमुनाके तटपर एक कुञ्जमें बछड़ोंको चरा रहे थे और पास ही दूसरे गोष्ठमें वृद्ध गोपगण गौओंको चरा रहे थे तो गौएँ दूरसे ही अपने बछड़ोंको देखकर स्नेहसे व्याकुल हो उनकी ओर दौड़कर चलीं तथा गोपोंके बहुत कुछ रोकनेपर भी न रुक सकीं । प्रस्रवभरेण भूयः स्रुतस्तनाः प्राप्य पूर्ववद्वत्सान् । पृथुरसनया लिहन्त्यस्तर्णकवत्योऽप्यपाययन्प्रमुदा ॥ दूधके उमड़नेसे उनके स्तन पुनः-पुनः बहने लगे और जिनके नये बछड़ोंने जन्म ले लिया था उन्होंने भी उमङ्गमें भर- कर अपने बछड़ोंको पूर्ववत् लंबी-लंबी जीभोंसे चाटते हुए खूब दूध पिलाया । गोपा अपि निजबालाञ्जगृहुर्मूर्धानमाघ्राय । इत्थमलौकिकलाभस्तेषां तत्र क्षणं ववृधे ॥२१२॥ गोपोंने भी अपने-अपने बालकोंका सिर सूँघते हुए उन्हें उठा लिया । इस प्रकार उस समय एक क्षणके लिये वहाँ अलौकिक उत्साहकी वृद्धि हुई । गोपा वत्साश्चान्ये पूर्वं कृष्णात्मका ह्यभवन् । तेनात्मनः प्रियत्वं दर्शितमेतेषु कृष्णेन ॥२१३॥ ६०

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