भारतकोश
प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Prashna Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

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( २ )

२३. पञ्च प्राणोंकी स्थिति... ... ...३९
२४. लिङ्गदेहकी स्थिति... ... ...४०
२५. प्राणोत्क्रमणका प्रकार... ... ...४२
२६. बाह्य प्राणादिका निरूपण... ... ...४३
२७. मरणकालीन संकल्पका फल... ... ...४५

चतुर्थ प्रश्न

२८. गार्ग्यका प्रश्न—सुषुप्तिमें कौन सोता है और कौन जागता है ?...४९
२९. इन्द्रियोंका लयस्थान आत्मा है... ... ...५२
३०. सुषुप्तिमें जागनेवाले प्राण-भेद गार्हपत्यादि अग्निरूप हैं...५४
३१. प्राणाग्निके ऋत्विक्... ... ...५६
३२. स्वप्नदर्शनका विवरण... ... ...५८
३३. सुषुप्तिनिरूपण... ... ...६५
३४. सुषुप्तिमें जीवकी परमात्मप्राप्ति... ... ...६९
३५. अक्षरब्रह्मके ज्ञानका फल... ... ...७१

पञ्चम प्रश्न

३६. सत्यकामका प्रश्न—ओङ्कारोपासकको किस लोककी प्राप्ति होती है ?...७३
३७. ओङ्कारोपासनासे प्राप्तव्य पर अथवा अपर ब्रह्म...७४
३८. एकमात्रविशिष्ट ओङ्कारोपासनाका फल... ...७६
३९. द्विमात्राविशिष्ट ओङ्कारोपासनाका फल... ...७७
४०. त्रिमात्राविशिष्ट ओङ्कारोपासनाका फल... ...७८
४१. ओङ्कारकी तीन मात्राओंकी विशेषता... ...८१
४२. ऋगादि वेद और ओङ्कारसे प्राप्त होनेवाले लोक... ...८३

षष्ठ प्रश्न

४३. सुकेशाका प्रश्न—सोलह कलाओंवाला पुरुष कौन है ?...८५
४४. पिप्पलादका उत्तर—वह पुरुष शरीरमें स्थित है... ...८८
४५. ईक्षणपूर्वक सृष्टि... ... ...९९
४६. सृष्टिक्रम... ... ...१०९
४७. नदीके दृष्टान्तसे सम्पूर्ण जगत्का पुरुषाश्रयत्वप्रतिपादन...११२
४८. मरण-दुःखकी निवृत्तिमें परमात्मज्ञानका उपयोग... ...११४
४९. उपदेशका उपसंहार... ... ...११५
५०. स्तुतिपूर्वक आचार्य्यकी वन्दना... ... ...११६