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प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Prashna Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished131 पृष्ठ
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( २ )
| मन्त्रप्रतीकानि | प्र० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|
| एष हि द्रष्टा स्प्रष्टा | ९ | ४ | ६९ |
| एषोऽग्निस्तपति | २ | ५ | २७ |
| तद्ये ह वै तत् | १ | १५ | २० |
| तस्मै स होवाच | १ | ४ | ६ |
| ,, ,, ,, | ... २ | २ | २४ |
| ,, ,, ,, | ... ३ | २ | ३६ |
| ,, ,, ,, | ... ४ | २ | ५२ |
| ,, ,, ,, | ... २ | ५ | ७४ |
| ,, ,, ,, | ... ६ | २ | ८८ |
| तान्वरिष्ठः प्राणः | ... २ | ३ | २५ |
| तान्ह स ऋषिः | ... १ | २ | ४ |
| तान्होवाचैतावत् | ... ६ | ७ | ११५ |
| तिस्रो मात्रा मृत्युमत्यः | ... ५ | ६ | ८१ |
| तेजो ह वा उदानः | ... ३ | ९ | ४४ |
| ते तमर्चयन्तः | ... ६ | ८ | ११६ |
| तेषामसौ विरजः | ... १ | १६ | २१ |
| देवानामसि वह्नितमः | ... २ | ८ | ३० |
| पञ्चपादं पितरम् | ... १ | ११ | १५ |
| परमेवाक्षरम् | ... ४ | १० | ७० |
| पृथिवी च पृथिवीमात्रा | ... ४ | ८ | ६७ |
| पायूपस्थेऽपानम् | ... ३ | ५ | ३९ |
| प्रजापतिश्चरसि | ... २ | ७ | २९ |
| प्राणस्येदं वशे | ... २ | १३ | ३४ |
| प्राणाग्नय एवैतस्मिन् | ... ४ | ३ | ५४ |
| मासो वै प्रजापतिः | ... १ | १२ | १७ |
| य एवं विद्वान्प्राणम् | ... ३ | ११ | ४६ |
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( ३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | प्र० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|
| यच्चित्तस्तेनैष प्राणम् | ३ | १० | ४५ |
| यथा सम्राडेव | ३ | ४ | ३८ |
| यदा त्वमभिवर्षसि | २ | १० | ३१ |
| यदुच्छ्वासनिःश्वासौ | ४ | ४ | ५६ |
| यः पुनरेतं त्रिमात्रेण | ५ | ५ | ७८ |
| या ते तनूर्वाचि | २ | १२ | ३३ |
| विज्ञानात्मा सह | ४ | ११ | ७१ |
| विश्वरूपं हरिणम् | १ | ८ | १० |
| व्रात्यस्त्वं प्राणैकर्षिंरत्ता | २ | ११ | ३२ |
| स ईक्षांचक्रे | ६ | ३ | ९९ |
| स एष वैश्वानरः | १ | ७ | १० |
| स प्राणमसृजत | ६ | ४ | १०९ |
| स यथेमा नद्यः | ६ | ५ | ११२ |
| स यदा तेजसा | ४ | ६ | ६५ |
| स यदा सोभ्य | ४ | ७ | ६६ |
| स यद्येकमात्रम् | ५ | ३ | ७६ |
| संवत्सरो वै प्रजापतिः | १ | ९ | ११ |
| सोऽभिमानादूर्ध्वम् | २ | ४ | २६ |
| हृदि ह्येष आत्मा | ३ | ६ | ४० |