प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary
महाकवि भास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( 10 ) (अ) बलशाली की उपमा सिंह से तथा दुर्बल की मृग से दी है । (ब) वीर व्यक्ति का सबसे अच्छा अस्त्र उसका हाथ बताया गया है । (स) नारद को "कलह प्रिय" कहा है । (द) शाप तथा शपथ का वर्णन इन सभी नाटको मे समान रूप से पाया जाता है । (क) भास ने अपने रूपको मे जीवन की विविधता और वैषम्य का चित्रण किया है, जिससे अश्रुसिक्त अवस्था का वर्णन भी अनेक स्थलो पर आया है । (ख) समान भावों का प्रयोग—जैसे दयनीय दृश्यो का वर्णन समान रूप से उपलब्ध है । ब्रह्मचारी पात्र के प्रवेश से नाटकीय कौतूहल को सजग बनाने का प्रयास प्रायः कई नाटको में पाया जाता है । परिव्राजक या तापस इसी का परिवर्तित रूप है । (ग) पिता को कन्या के विवाह की चिन्ता, अमात्य का दायित्व, अपराध निरीक्षण एव कला संबधी प्रेम ऐसे भाव है, जिनकी आवृत्ति विभिन्न प्रसंगों मे प्रायः कई नाटकों में पाई जाती है । (घ)