भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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पृष्ठ 98

( 95 ) अन्वय—अस्मासु किञ्चित् वक्तवयम् ; विशिष्टः प्रतिपाल्यते । अयं प्रतिषेधः किं कृतः, नियमप्रभविष्णुता । (६) अन्वय—एते ते असुरपुरवधे दैवतानाम् अभिसरीम् गच्छन्ति । एते ते सपुरजनपदाः स्वसुकृतैः शक्रलोके गच्छन्ति । एते ते कृत्स्नाम् वसुमतीम् स्वभु- जबलजिताम् प्राप्नुवन्तः (सन्ति) । एते ते छन्द मृगयता मृत्युना चिरम् अनव- सिताः । (६) हिन्दी अर्थ भरत—तब तक किस जगह विश्राम करूँ । ठीक' है, देख लिया । वृक्षों के मध्य दिखने वाले इस मन्दिर में थोड़ी देर तक आराम करूँगा । इस प्रकार देवदर्शन और विश्राम दोनो काम हो जायेगे । और नगर के समीप थोडी देर बैठ कर फिर उसमे प्रवेश करना चाहिए, इस प्रकार शिष्टाचार का भी पालन हो जाएगा । अतः रथ को रोको । सूत—जैसी दीर्घायु की आज्ञा । (रथ ठहराता है) भरत—(रथ से उतरकर) सूत, घोडो को एक ओर ले जाकर आराम कराओ । सूत—जो आज्ञा । (निकल जाता है) भरत—(कुछ चलकर और देखकर) यहाँ तो विधिवत् खील और फूल के नैवेद्य दिए गए है । दीवारो की पुताई के ऊपर चन्दन से पाँचो अंगु- लियों की छापें लगाई गई है । दरवाजो पर फूलो की मालाएँ लटक रहीं है । बाहर रेत बिछी है । क्या कोई त्यौहार है, जिसकी यह विशेषता है अथवा प्रतिदिन का नियम पालन है । यह कौन से देवता का स्थान हो सकता है । यहाँ शस्त्र, ध्वजा आदि बाहरी चिह्न भी तो नही दीख पड़ते । ठीक है, अन्दर जाकर ज्ञात करूँगा । (प्रवेश करके और देखकर) अहा, पत्थर की कारीगरी कितनी अच्छी है । मूर्तियो मे भावव्यंजना सजीव प्रतीत होती है । ये प्रतिमाएँ देवताओ की होकर भी मनुष्यो के समान जान पडती है । क्या यह चार देवताओ की मूर्तियो का समूह है ? अथवा जो कुछ भी होवे । मुझे तो इन्हे देखकर अपार आनन्द हो रहा है ।

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