प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)
Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य क्षेमराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना जिस प्रकार वेदान्तदर्शन समझने के लिए छोटे ग्रंथों में 'वेदान्तसार' नामक ग्रन्थ बहुत उपयोगी है उसी प्रकार प्रत्यभिज्ञादर्शन समझने के लिए प्रत्यभिज्ञाहृदयम्' बहुत उपयोगी है । कई वर्ष पूर्व मैंने इसका अँगरेज़ी में अनुवाद किया था । अब इसका हिन्दी में अनुवाद कर दिया है । प्रत्येक पृष्ठ पर मूल संस्कृत पाठ देकर उसके नीचे उसका हिन्दी अनुवाद दिया है । पुस्तक के अन्त में पारिभाषिक और दुरूह शब्दों पर विस्तृत टिप्पणियाँ दी गई हैं जिनके द्वारा इस दर्शन का रहस्य सरलता से समझ में आ सकता है । प्रारम्भ में एक उपोद्घात में इस दर्शन के मुख्य सिद्धान्तों का विवेचन किया गया है । उपोद्घात और टिप्पणियाँ इस अनुवाद की सबसे बड़ी विशेषताएँ हैं । उपोद्घात के अनन्तर प्रत्येक सूत्र में प्रतिपादित विषय का संक्षिप्त सार दे दिया गया है । अनुवाद इस प्रकार से किया गया है कि मूल के प्रत्येक शब्द का अर्थ भली भांति समझ में आ जाय । इस ग्रंथ को मुझे कश्मीर के प्रत्यभिज्ञादर्शन के अद्वितीय मर्मज्ञ स्वामी लक्ष्मण जू ने स्नेहपूर्वक पढ़ाया । इसके लिए मैं उनका बहुत ही कृतज्ञ हूँ । कुछ कठिन सूत्रों को समझने में महामहोपाध्याय डॉक्टर गोपीनाथ कविराज की गवेषणापूर्ण व्याख्या से मुझे बहुत लाभ हुआ है । एतदर्थ मैं उनके प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ । ग्रंथ के कुछ कठिन स्थलों के मूल को समझने में मुझे आचार्य पण्डित रामेश्वर झा से बड़ी सहायता मिली है । इसके लिए मैं उनके प्रति हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करता हूँ । इस ग्रन्थ में 'आत्म' शब्द का प्रयोग सर्वत्र पुल्लिंग में हुआ है । जयदेव सिंह