भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 470 में से

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आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासौ । १०१ ॥ बीसलदेवजी को सांप का काटना और उस से उन का मरना ॥ दूहा ॥ वार रवी तिथि सत्तमी । चलि रथ सुतर सतंग ॥ तिहि वेरां आयौ कहै । डेरा माँचि पनंग ॥ छं० ॥ ५०८ ॥ रु० ॥ २५२ ॥ कवित्त ॥ देषि राज करि क्रोध । वान को दंड धरिय कर ॥ वेधि पनग फन छिक्कि । पद्यौ धर तरफत बेसिर ॥ कुट तिहि बेर सतंग । खेल देषन कौं धायौ ॥ एक मोजरी मढ़ि । पनग फन आनि लुकायौ ॥ फिरि राय आय हेंवर चढ्यौ । पहरत मोजे पग डस्यौ ॥ भवितव्य बात आघात गति । इतनी कहि राजन ढस्यौ ॥ छं० ॥ ५०९ ॥ रु० ॥ २५३ ॥ दूहा ॥ ओषद मंच अनंत जप । कितने करे उपाय ॥ ज्यों ज्यों तन लहरत चढत । त्यों त्यों दुचितौ राय ॥ छं० ॥ ५१० ॥ रु० ॥ २५४ ॥ कवित्त ॥ राज मरन उपनो । सब्ब जन सोच उपन्नौ ॥ पट रागिनि पावार । निकसि तब ही सत किन्नौ ॥ तिन मुष इम उच्चरौ । होइ जदवनि सपुत्तय ॥ यो असीस इह फुरौ । तुम्म भोगवहु धरत्तिय ॥ जिन रथी मढ़ि उठे अतुर । धपै ज्वाल तिन मुष विषय ॥ नर भषय जहां लसकर* सहर । मिलै मनिष ते ते अभय ॥ छं० ॥ ५११ ॥ रु० ॥ २५५ ॥ २५२ पाठान्तर :-तिथ । सपतमी । तिथि । कह्यो । डेरां । मांहि । माहि । पबंग ॥ २५३ पाठान्तर :-वांन । बंड । नाग । छिक्र । वेंसिर । छुट्यो । सं० १७९० और १६४७ में “मिलि राजन मोजरीय” । को । आयौ । मधि । पनंग । आंनि । आय राय ॥ २५४ पाठान्तर :-उपद्द । उपाइ । ज्यों ज्यों । लहरी । त्यो त्यो । दुचितो ॥ २५५ पाठान्तर :-उपनौ । ऊपनौ । उपंतो । निकसी । कीनो । इह । उच्चलौ । सपुतय । सपुतह । कुरौं । भोगवो । धरतय । इन । मधि उठै । भपै । शहर । मिले । मनुष । भपै ॥

  • हिं० लसकर (SK: लश To be skilful or clever, to do anything skilfully and scien- tifically or लस To play or sport, to work and कर Who or what does, makes or causes.) Hence a camp or cantonment &c.
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