भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

सूचीपत्र । १३ पृष्ठ ६२ पृथ्वीराज का विश्राध कर घर पहुंचना ॥ ... ... ... ... ३६७ ६३ पृथ्वीराज की प्रशंसा ॥ ... ... ... ... " [ ८ ] मेवाती मुगल कथा ॥ (पृष्ठ ३६६ से पृष्ठ ३८४ तक) १ सोमेश्वर के मंडोवर जीतने और लूट को सरदारों में बांट कर प्रचल प्रताप के साथ राज्य करने का वर्णन ॥ ... ... ... ... ३६६ २ सोमेश्वर के गुणों और उसकी गुणग्राहकता का वर्णन ॥ ... ... " ३ सोमेश्वर का मेवात के राजा मुगल (मुद्गल राय) के पास कर लेने के लिये दूत भेजना ॥ ३७० ४ राजा मुद्दल का यह पत्र पाकर क्रोध प्रगट करके दूत को लोटा देना और सोमेश्वर का पत्रोत्तर पाकर क्रोध करना और उन पर चढ़ाई करने की आज्ञा देना ॥ ... ... ५ ज्योतिषियों से मुहूर्त्त दिखाकर पुष्य नक्षत्र में चढ़ाई के लिये निकलना ॥ ... ... ३७१ ६ घर की रक्षा के लिये पृथ्वीराज को घर पर छोड़ा ॥ ... ... ... " ७ यात्रा के समय अच्छे शगुन मिलने ॥ ... ... ... ३७२ ८ पृथ्वीराज को राज्य में छोड़कर सोमेश्वर का मेवात पर चढ़ाई करना और उसकी सूचना पत्र द्वारा मुद्दल राय को दे कहना कि लड़ो वा दंड दे आधीन हो ॥ ... " ६ मुद्दलराय का पत्रोत्तर देकर सोमेश्वर और पृथ्वीराज दोनों से लड़ाई मांगना ॥ ... ३७३ १० सोमेश्वर का अपने लड़के के वध के विषय में संशय करना ॥ ... ... " ११ और पृथ्वीराज के पास मुद्दल राय के पत्र का संदेसा भेजना और उसका रोष में आकर पिता के पास रण में आ मिलना ॥ ... ... ... ... " १२ पृथ्वीराज का पिता के पास पहुंच कर सब सेना को सोते हुए पाना और सोमेस का उससे न बोलना ॥ ... ... ... ... ३७४ १३ उसका पिता को निद्रा में और शत्रु की सेना को देख भाल कर उत्तापित होना ॥ ... " १४ और उसका शत्रु की सेना पर झपटना ॥ ... ... ... " १५ पृथ्वीराज और मुद्दल राय का युद्ध ॥ ... ... ... " १६ ऐसे पृथ्वीराज के अन्य सूर मुद्दल के योद्धाओं से लड़े ॥ ... ... ३७५ १७ कन्ह का मेवातियों से युद्ध ॥ ... ... ... " १८ कैमास का पठान वाजीद खां से युद्ध ॥ ... ... ... ३७६ १६ लूंभ से राम गूजर का युद्ध ॥ ... ... ... " २० इतने में पृथ्वीराज का रण के बीच में अचानक जा पहुंचना और घोर युद्ध का होना ॥ ... " २१ मुद्दलराय की फौज का तितर बितर होना और उसका पकड़ा जाना ॥ ... ... ३७७ २२ कवि का सोमेश्वर की सेना और घोड़े हाथी की यज्ञादि अनेक उपमाओं के साथ प्रशंसा करना ॥ " २३ रण में मरे और घायल कैसे दीखते थे और कौन कौन योद्धा किस किस से घायल हुए और मारे गए ॥ ... ... ... ... ३७६ २४ जयजयकार का उपमाओं के सहित वर्णन ॥ ... ... ... ३८१ २५ पृथ्वीराज की विजय ॥ ... ... ... ... ३८३ ( ६ ) हुसेन कथा ॥ (पृष्ठ ३८५ से पृष्ठ ४२४ तक) १ मभरि नरेश (पृथ्वीराज) और गज़नी के शाह (शहाबुद्धीन) से कैसे बेर हुआ इसका वर्णन ॥ " २ शहाबुद्दीन के भाई मीर हुसेन के गुणों और उसकी वीरता की प्रशंसा ॥ ... ... ३८५ ३ शहाबुद्दीन की पातुर चित्ररेषा की प्रशंसा, शहाबुद्दीन का उसपर प्रेम, मीर हुसेन का भी उसपर आसक्त होना और चित्ररेषा का भी मीर को चाहना ॥ ... ... ... ३८६