पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 19, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूचीपत्र । १० पृष्ठ १६ युद्धारम्भ, युद्ध वर्णन ॥ ... ... ... ... ... ... ४३१ १७ पांच सरदारों का पृथ्वीराज की रक्षा में चारों ओर हो जाना और इन सभों का यवनों के बीच में घिर कर युद्ध करना ॥ ... ... ... ... ... ... " १८ पृथ्वीराज का कमान सँभाल कर यवन सरदारों को गिराना ॥ ... ... ... ४३२ १९ पृथ्वीराज का तलवार लेकर यवनों का विनाश करना ॥ ... ... ... " २० सुलतान की ७७५ सेना का कट कर आगे गिरना ॥ ... ... ... ... " २१ चानुका का घोर युद्ध करके वीरता के साथ मारा जाना ॥ ... ... ... " २२ क्रोध करके पृथ्वीराज का तलवार से युद्ध करना, पृथ्वीराज को सब सेना का इकट्ठा होजाना ॥ ४३२ २३ सुलतान का बढ़कर लड़ना दो घड़ी युद्ध करना ॥ ... ... ... ... ४३४ २४ यवन सरदारों का माराजाना, पृथ्वीराज की विजय ॥ ... ... ... " २५ हारकर शहाबुद्दीन का गज़नी की ओर लौटजाना ॥ ... ... ... " २६ चौहान की विजय पर चन्द कवि का जे जे कार करना ॥ ... ... ... ४३५ २७ उपसंहारकी टिप्पणी ॥ ... ... ... ... ... ४३६
[११] चित्ररेखा समय । ( पृष्ठ ४३६ से ४४५ तक ) १ चित्ररेखा की उत्पत्ति पूछना ॥ ... ... ... ... ... ४३६ २ शहाबुद्दीन के विक्रम का वर्णन ॥ ... ... ... ... " ३ शहाबुद्दीन का अरव खां पर चढ़ाई करने की इच्छा कर सरदारों से पूछना ॥ ... " ४ अरव खां नमता नहीं है इसलिये उस पर चढ़ाई होनी चाहिये यह आज्ञा देना ॥ ... ४४० ५ चढ़ाई की सेना की संख्या ॥ ... ... ... ... ... " ६ सेना की धूम का वर्णन ॥ ... ... ... ... " ७ शाह का निसुरति खां को अरबखां के पास भेजना कि चित्ररेखा को देकर पैर पर गिरे तो हम क्षमा करदें ॥ ... ... ... ... ४४१ ८ अरब खां का सादर आज्ञा मानना और चित्ररेखा को देना स्वीकार करना ॥ ... " ९ निसुरति खां का अरब खां को शाबसी दे कहना कि तुमने शाह के वचन माने और हिंदू धर्म को ⎬ ४४२ न मान कर म्लेच्छ कुल कर्म को धारण किया सो ठीक किया ॥ ⎭ १० शहाबुद्दीन का सेना समेत सजकर चलना ॥ ... ... ... " ११ चलते समय शाह का चित्त चित्ररेखा में मत्त गयंद की भांति लगा हुआ था ॥ ... " १२ सेना की शोभा का वर्णन ॥ ... ... ... ... ४४३ १३ शाह की सेना की प्रबलता देखकर अरब का अपना बल भंग होना बाहना ॥ ... " १४ अरव खां का आज्ञा मानकर चित्ररेखा को भेंट में देना ॥ ... ... ... ४४४ १५ चित्ररेखा वेश्या के रूप का वर्णन ॥ ... ... ... " १६ विना युद्ध चित्ररेखा को देखकर गोरी का लौट आना ॥ ... ... ... " १७ चित्ररेखा के साथ शाह के आदर और प्रेम का वर्णन ॥ ... ... ... " १८ चित्ररेखा के सुलतान को वश करने का वर्णन ॥ ... ... ... ४४५ १९ चित्ररेखा को कथा सुनकर कवि का आनन्दित होना ॥ ... ... ... "