भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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३६२ पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय ३४ थल जए ए ताम । चंद ओपम तहां पाई ॥ मांनहु वीर समुद्र । दयौ फत्त ध्य्य बधाई ॥ धार धार चढि सूर । सूर कीर्त्ति विमलं ॥ धंनि धंनि उच्चार । सीस नच्चौ सुकमलं ॥ छं० ॥ १६४ ॥ रू० ॥ १०१ ॥ नाहरराय का भागना और पृथ्वीराज का पीछा करना ॥ कवित्त ॥ भग्गा नाहर राई । पाई मुक्कै नाहर जिम ॥ जिम जिम भर कह्रई । रोस लग्गा वर तिम तिम ॥ बेत सोधि चहुआनं । पर्यो तूंवर पाछारी ॥ बर* परस्यौ तहां गोइंद । पर्यौ भट्टी अधिकारी ॥ षांची प्रसंग बंधव उसै । मोह सुबंधा बंध वर ॥ तिम तिम सु तेग तारून षसै । तिस तिम बुट्ठे सार नर ॥ छं० ॥ १६५ ॥ रू० ॥ १०२ ॥ चिविध सहस्र नाहर * बसंत । पच कायर तन झारिय ॥ वीर रूप तप भान । नीर सूखै षत्त भारिय ॥ तत्तरि तुंअर नरिंद । भयौ तरु गहर पत्त कूँछ ॥ छांच स्वांमि संमूह । जूझ टारिय सुअंग तच्छँ ॥ फल फूल कित्ति पंषी वरन । विमुख न भौ संमुह लख्यौ ॥ गंधर्व वीर चालुक वरन । मरन वीर अच्छरि बरयौ ॥ छं० ॥ १६६ ॥ रू० १०३ ॥ १०१ पाठान्तर-जांनि । जानैं । नच्चैौ । सुर । मानहु । थल ए उए तांम । उपम । पाइय । मानहु । हथ । बधाइय । किए ति । किए सु । धनि २ । उच्चार । नंच्यौ ॥ १०२ पाठान्तर-नाहरराय । पाय । मुक्या । कह्रई । रोस । चहुवान । चाहुआनं । तूंवर । तूंअर । पहारी । परहारी । * अधिक पाठ है । तथा उलट पुलट पाठ ऐसा है-बर गोइंद तहां पस्यौ । बध्या बंधवर । तेज ॥ १०३ पाठान्तर-सस्त्र । * अधिक पाठ है । झारीय । भांन । सुक्कै । झारीय । तत्तारी । तूंअर । तोअर । पंत्त सह । पत्त कूंह । छाह । स्वांमि । टारीय । तहां । भौं। गंधर्व्व वीर चारन वरन । अक्करि ॥