पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 386, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें३७६ पृथ्थीराजरासो । [ आठवां समय ८ कैमास का पठान बाजीदखां से जुद्ध ॥ कवित्त ॥ वाम अंग पठान । विरचि बाजीद † सुपंनिय ॥ उन उप्पर कैमास । हुकम प्रथीराज सुदिंनिय ॥ सीस नांपू बल बाहू । जाइ लग्गिय घन रोसन ॥ तीर तुषक्क तरवारि । तच्छि निकरै उर ओरन ॥ अबरद्द नद्द नीसान धुनि । लगी लाग मारु बजन ॥ रन तूर तूर तवलन चक्क । गहक धक्क रज्जे रजन ॥ छं० ॥ ३५ ॥ रू० ॥ २२ ॥ कूरंभ से राम गूजर का युद्ध ॥ कवित्त ॥ दख्खिन दिसि कूरंभ । नांम नरेन निथदिय ॥ तिन पर गुज्जर राम । करन दस दूवस वदिय ॥ समर अमर परैं सूर । चंपि जनु जांनि उद्भारिय ॥ लोए उच्चरि बुड़ि जाँचि । मुररि मरदांन मुक्कारिय ॥ अन भंग अंग तन तन तकहिँ । हकहिँ बकहिँ बज्जहिँ सखिय ॥ अनभूम भूत भिरैं भूत भुव । समर श्रोन सरिता चखिय ॥ छं० ॥ ३६ ॥ रू० ॥ २३ ॥ इतने में पृथ्वीराज का रण के बीच अचानक जा पहुँचना और घोर युद्ध का होना ॥ छंद भुजंगी ॥ जयं जाय पत्तौ प्रथीराज जुद्धं । करी सब्ब सेना बिरुद्दं बिरुद्दं ॥ २२ पाठान्तर-वाम । पठांन । सुयं । नीय । प्रथीराज दनियं । नांह । बाहूं । लाइं । तबक । तरवार । निकसै । उंरन । नीसांन । हक्क । रंजे ॥ † बाजीदखां नामक पठान मुद्गलराय का एक बड़ा लड़ाका सेनापति अर्थात् जनरल था और परदेशी सिपाही उसके विभाग में थे । यह वृत्त इस महाकाव्य में जो मुसलमानी भाषा के शब्द आते हैं उनके विषय की शंका मिटाने के लिये बड़ा उपयोगी है ॥ २३ पाठान्तर-दखिन । दिशि । नांम । नरि ननिवट्टिय । गुजर । रांम । दूबल । वटिय । परे । परे । जांनि । लोहरि । जांहि । मरदांव । मुकारीय । तकहिं । बकहि । हकहिं । भिरें । भुय । झलिय ॥