पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
DevanagariHindipublished470 पृष्ठ
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दसवां समय ११] पृथ्वीराजरासो । ४३५ चौहान की विजय पर चन्द कवि का जै जै कार करना ॥ दूहा ॥ जीति राज चहुवांन वन । आखेटक असुरान ॥ जै जै जै कविचंद कहि । चंद सूर वप्पान ॥ छं० ॥ ३६ ॥ रु० ॥ ३१ ॥ इति श्री कविचंद विरचिते पृथिराजरासके राजा पहूवन आखेटक रन सुरतांन चूक करनं नाम दसम प्रस्ताव संपूर्णम् ॥ १० ॥ ३१ पाठान्तर-चहुवांन । असुरान । वषान ॥