भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 8

६ सूचीपत्र । पृष्ठ । १६१ पृथ्वीराजजी की कथा का आरंभ करना ॥ ... ... ... १३३ १६२ सोमेश्वरजी का अपने तेज बल से तपना ॥ ... ... ... " १६३ अनंगपालजी का अपनी दो पुत्रियों में से सुन्दरी विजपालजी को और कमला सोमेश्वर जी को प्रदान करना ॥ ... ... ... ... १३४ १६४ जिस दिन सोमेश का विवाह हुआ उस दिन क्या २ हुआ ॥ ... ... " १६५ सोमेश्वरजी की रानी के गर्भ रहना और उस का प्रतिदिन बढ़ना ॥ ... ... १३५ १६६ सोमेश्वरजी की तुँअर रानी का पृथ्वीराजजी को जनना ॥ ... ... " १६७ सोमेशजी के प्रथम पुत्र ढूँढा के घर से होना स्मरण कर गंधर्वोटि का प्रसन्न होना और उत्सव मानना ॥,, १६८ जिस दिन पृथ्वीराजजी का जन्म हुआ उस दिन देशान्तरों में क्या २ हुआ ॥ ... ... १३६ १६६ अनंगपालजी का अपनी पुत्री के पुत्र को देखना और उत्सव करना ॥ ... ... १३७ २०० पृथ्वीराजजी का जन्म होना सुनकर सोमेशजी का उत्सव करना ॥ ... ... १३८ २०१ सोमेश जी का पृथ्वीराजजी को अपने घर लाने को कहना ॥ ... ... " २०२ सोमेशजी का पृथ्वीराजजी को अजमेर ले आना ॥ ... ... " २०३ पृथ्वीराजजी का जन्म संवत् और उनके प्रागट्य का हेतु ॥ ... ... " २०४ पृथ्वीराजजी के शक की संज्ञा का सूत्ररूप कवि का वाक्य ॥ ... ... " २०५ सोमेश्वरजी के अपूर्व तप से पृथ्वीराजजी उत्पन्न हुए ॥ ... ... १४५ २०६ सो' श्वरजी का राव (वेन) को बधाई देना ॥ ... ... " २०७ पृथ्वीराजजी के जन्मोत्तर गुणों का वर्णन ॥ ... ... १४६ २०८ सोमेशजी को पृथ्वीराजजी के जन्मोत्तर गुन सुनकर हर्ष और शोक होना ॥ ... ... " २०६ विक्रम के सदृश पृथ्वीराजजी हुए कि जिन की बुद्धि का वर्णन चंद करता है ॥ ... ... १४७ २१० पृथ्वीराजजी के जन्म संवत के ग्रहों की स्थिति ॥ ... ... " २११ सोमेश्वरजी का दरबार में बैठ ज्योतिषियों से पृथ्वीराजजी की जन्मपत्री का फल पूछना और पंडितों का फल वर्णन करना ॥ ... ... ... " २१२ पृथ्वीराजजी के जन्म होने पर क्या २ आश्चर्यदायक बातें हुईं ॥ ... ... १५१ २१३ पृथ्वीराजजी की बाल अवस्था के चरित्रों का वर्णन ॥ ... ... " २१४ पृथ्वीराजजी का गुरु राम से सब प्रकार की विद्या सीखना ॥ ... ... १५३ २१५ एक दिन रात्रि को चंद की स्त्री का रस में आकर पृथ्वीराजजी को आदि से अंत तक कीर्त्ति वर्णन करने के लिये चंद को कहना ॥ ... ... ... १५७ २१६ चंद का अपने घर में कथा कहना और स्त्री का उसे सुनते हुए जो स्मरण आवै वह पूछते जाना ॥ ... ... ... ... १५८ २१७ चंद की स्त्री का उस से पूछना कि केन दानव, मानव, और नृप कीर्त्ति करने के योग्य है ॥ ... " २१८ चंद का अपनी स्त्री को गूढ उपालंभों के द्वारा उत्तर दे कहना कि केवल हरि कीर्त्ति करने योग्य है क्योंकि उन की भक्ति के बिना मुक्ति नहीं है ॥ ... ... ... " २१६ चंद की स्त्री का उसे कहना कि चित्रनेवाले को चित्र कि जिससे तू दुस्तर के पार उतरे चहुवान की कीर्त्ति कहने से वह क्या रंजेगा ॥ ... ... ... १५६ २२० चंद का अपनी स्त्री को कहना कि मैं चहुआन का ऋण उतारता हूं ॥ ... ... " २२१ चंद की स्त्री का कहना कि राजा को ऋण देता है तो गोविन्द को क्यों नहीं सुमरता ॥ १६० २२२ चंद का उत्तर देना कि मैं कमलासन को देख कर अकुनाया हूं केवल भक्ति विंलब करनेवाली है ॥ " २२३ तथा चंद का कहना कि संसार में जो कुछ और सर्वव्यापी है वह कमलासन ही है उसी की उपमा करके मैं पृथ्वीराजजी की कीर्ति वर्णन करता हूं ॥ ... ... " २२४ चंद की स्त्री उसे कहती है कि ब्रह्म को ब्रह्म में देख जो उसे देखता है उसे वह टोकता है, नर की कीर्त्ति मत गा क्योंकि उस से और कोई बलवंत नहीं है ॥ ... ... १६१ २२५ चंद का अपनी स्त्री को उत्तर दे कहना कि अंग २ में हरि रूप रस हैं ॥ ... ... " २२६ चंद की स्त्री का उसे कहना कि अंग २ में हरि रूप रस वर्णन कर दिखाओ ॥ ... ... १६२ २२७ चंद का उत्तर दे कहना कि कान दे सुन मैं वर्णन कर दिखाता हूं ॥ ... ... " २२८ उपसंहारणी टिप्पण ॥ ... ... ... ... १६३