भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 86

आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासौ । ७५ ॥ बीसलदेवजी का पुरुषत्व नाश होने से दुचित्त हो गोकर्णे- श्वर की यात्रा करने को गुजरात में जाना ॥ अति दुचित्त राज भय काम नास। ब्रह्मचर्य नेम लियौ चतुरमास ॥ ३७८ ॥ कातक करत पहुकर सनान । गोक्रन्न * महातम सुनत कान ॥ बुझाय नैतसिय गोछवान् । तुम भूमि पास नागरह † चाल ॥ ३८० ॥

  • इन गोकर्णेश्वर महादेवों की उत्पत्ति-कथा स्कंध पुराणान्तर्गत जो नागर ब्राह्मणों का एक परमपूज्य संस्कृत भाषा में २४००० हजार श्लोकों की संख्या का नागरखंड नामक ग्रंथ है उस के २६ वें अध्याय में लिखी है । यह संपूर्ण ग्रंथ मेरे पुस्तकालय में है ॥ आज जो वडनगर और बीसननगर नामक नगर गुजरात में प्रसिद्ध हैं उन का प्राचीन नाम चमत्कारपुर था, उस की सीमा का प्रमाण उक्त ग्रंथ के १६ वें अध्याय में नीचे लिखे प्रमाण लिखा है अर्थात् इन गोकर्णेश्वरों को उस की दक्षिणोत्तर सीमा पर होना प्रकाश किया है :- ऋषय ऊचुः ॥ चमत्कारपुरोत्पत्तिः श्रुतात्वत्तो महामते । तत्क्षेत्रस्य प्रमाणं यत्तदस्माकं प्रकीर्तय ॥ १ ॥ यानि तत्र च पुण्यानि तीर्थान्याय तनानि च । सहितानि प्रभावेन तानि सर्वाणि कीर्तय ॥ २ ॥ सूत उवांच ॥ पंचक्रोश प्रमाणेन क्षेत्रं ब्राह्मण सत्तमाः । आयामव्यास तश्चैव चमत्कारपुरोद्भवं ॥ ३ ॥ प्राच्यां तस्यां गयाशीर्षं पश्चिमेन हरेः पदं । दक्षिणोत्तरयोश्चैव गोकर्णेश्वर संज्ञिकं ॥ ४ ॥ हाटकेश्वर संज्ञं तु पूर्वमासी द्विजोत्तमाः । तत्क्षेत्रं प्रथितं लोके सर्वपातक नाशनं ॥ ५ ॥ यतः प्रभृति विप्रेभ्यो दत्तं तेन महात्मना । चमत्कारेण तत्स्थानं नाम्ना ख्यातिं ततो गतं ॥ † नागरह = उक्त नागरखंड जिस के भले प्रकार पढ़ने में आया होगा वह कह सक्ता है कि आनर्त देश में हाटकेश्वर क्षेत्र है उस में जो आज बड़नगर नाम से प्रख्यात है वह नगर यही है । इस के सत्युग में आनन्दपुर, त्रेता में चमत्कारपुर, द्वापर में मानपुर अर्थात् मनीपुर, और कलि में नगर अर्थात् बड़नगर नाम प्रसिद्ध हुए हैं । इस के अतिरिक्त यह भी ध्यान में रखने जैसी बात है कि नागर ब्राह्मणों में से जो आज बीसननगरा नामक नागर ब्राह्मण प्रसिद्ध हैं वह बड़नगरों में से इन ही बीसलदेवजी के समय में उन के दान लेने से पृथक हुए हैं और वीसननगर नामक जो नगर आज गुजरात में प्रसिद्ध है वह इस समय का इन ही बीसलदेवजी का प्रदान किया हुआ है । नागरखंड से यह भी ज्ञात होगा कि बीसलदेवजी के समय में जिन नागर ब्राह्मणों को दान दिये गये हैं उन में से कुछ उस समय पुष्कर में भी रहते थे और यही लोग बीसनदेवजी को पुनश्च पुंसत्व प्राप्त कराने को गोकर्णेश्वर की यात्रा जिस का