पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)
Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary
कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरोहणसागरैः . अशक्यं निधिनाथे(l.11)न कोशाध्यक्षत्वमीयुषा ॥Wait, look atप्राप्तैर्मरोहणसागरैः: Wait, is it प्राप्तैर्मेरु रोहणसागरैःorप्राप्तैर्मेरु°? In the image: प्राप्तैर्मेरु रोहणसागरैः- there is a space, orप्राप्तैर्मेरु रोहणसागरैःorप्राप्तैर्मेरु°? Wait, मेhas an e-matra,रुhas a space beforeरोहण? Look at line 10: असाध्यं कोशतां प्राप्तैर्मेरु रोहणसागरैः .Wait, footnote 8: "8 Ms. °प्राप्य° corrected to °स्साध्य°." Footnote 9: "9 Ms. प्राप्ते lc. on margin." Footnote 6: "6 Ms. °तैमे°." Footnote 7: "7 Ms. °दिभि°." Wait,प्राप्तैर्मेरु-> footnote 6 is onप्राप्तैर्मेरु! "6 Ms. °तैमे°." Line 10: असाध्यं कोशतां प्राप्तैर्मेरु रोहणसागरैः .`
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