पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)
Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary
श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा
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| पृष्ठे. | पङ्क्तौ. | अशुद्धम्. | शुद्धम्. |
|---|---|---|---|
| ८८२ | १ | प्रसादएववलवान् | प्रदानमेवबलवत् |
| ,, | ८ | प्राबल्येन तेन | प्राबल्ये न तेन |
| ८८५ | ४ | भावास्सत्यकाम | भावात्सत्यकाम |
| ८८६ | २२ | ‘गुरुत्यागी’ इति | ‘गुरुत्यागे’ इति |
| ८८९ | ६ | मुं. १-२. | मुं. १-२-१२. |
| ,, | २१ | पदिव्यत्य | पदव्यत्य |
| ८९० | १६ | बाधो नत्यर्थः । | बाधो नेत्यर्थः । |
| ८९१ | १५ | अतपव | अतएव |
| ,, | २९ | बिम्बदर्शनयैवेनं | बिम्बं दर्शयन्नेव |
| ९०० | २८ | श्रधिकरणम् | अधिकरणम् |
| ९०७ | २६ | ‘ |