भारतकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

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( १२२० ) पृष्ठे. पङ्क्तौ. अशुद्धम्. शुद्धम्. १०४८ २७ दक्षिणेति दक्षिण इति ,, ,, उत्तरायणमरणा 'उत्तरायणे' मरणा १०५० ८ विपरिणतव्य विपरिणेतव्य १०५२ ५ पक्षेन पक्षेण १०५७ १७ छन्दोगे छान्दोग्ये १०५९ १५ तच्चलिङ्गं तच्च तन्न लिङ्गं १०६१ १५ शौंशुमार शैंशुमार १०६२ १ छा. ५-१०-२. छा. ४-१५-६. १०७७ १८ शरीरमर्त्ये शरीरंमर्त्य १०७९ २६ तत् पतत् १०८३ १५ नियाम्यत्व नियम्यत्व ,, २५ परग्रहगत परगृहगत १०८५ १५ छन्दोगेपि छान्दोग्येपि १०८७ ९ राक्षेपा रापेक्षा १०९० २४ इत्यत्रैव इत्यत्रेव ११०१ ३ मक्ति मुक्ति ,, ८ खश्रेष्ठ खःश्रेष्ठ ,, २६ व्यापारेति व्यापार इति ११०४ २८ स्थिताः स्थिता ११०६ १ मात्रस ⎬ मात्रसाम्य ाम्यलिं ⎭ ११०७ ३ स्यात्युख स्यात्सुख ११०९ ८ अरयायमर्थः अस्यायमर्थः ११११ २ दर्शित दर्शितं ,, १८ दर्शितं दर्शित ,, २६ रामाविषय रामविषय ॥ इति चतुर्थाध्यायस्सम्पूर्णः ॥

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