भारतकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

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ानुष्ठेयत्वेन... * Wait, what if it is अवश्यानुष्ठेयत्वेन? Yes, अवश्य + अनुष्ठेयत्वेन combined with akas savarne dirghah gives अवश्यानुष्ठेयत्वेन! * Wait, "अवश्य" can be used as an adjective: अवश्यम् / अवश्या / अवश्यः? No, but in Sanskrit compounds or sandhi: अवश्य + अनुष्ठेय = अवश्यानुष्ठेय! * Yes! "अवश्यानुष्ठेयत्वेन" is a perfectly valid tatpurusha/karmadharaya compound: अवश्यमनुष्ठेयम् = अवश्यानुष्ठेयम्, तस्य भावस्तत्त्वं, तेन -> "अवश्यानुष्ठेयत्वेन निरूप्यन्ते"! * Therefore, the last letter of line 12 is definitely श्या! अवश्या! * And line 13 starts with नुष्ठेयत्वेन! That explains it completely! * Line 13: नुष्ठेयत्वेन निरूप्यन्ते अत्रेति साधनविचार इत्यर्थः । 'अयं' उपक्रम्य * Line 14:माणः । अनेन समन्वयाविरोधार्थकाभ्यां अध्यायाभ्यामस्यान्तर्यल * Wait,मस्यान्तर्यल

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