भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

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४५८रघुवंशमहाकाव्ये

**भावार्थ—**रामकी आज्ञा से राक्षसराज विभीषण और उनके साथी भी रथों पर चढ़ गये, वे रथ यद्यपि मनुष्यों के बनाए थे फिर भी वे इतने सुन्दर थे कि राक्षसों की माया से बनाए हुए रथ भी उनके सामने तुच्छ थे ॥ ७५ ॥

भूयस्ततो रघुपतिर्विलसत्पताक-
  मध्यास्त कामगति सावरजो विमानम् ।
दोषातनं बुधबृहस्पतियोगदृश्य-
  स्तारापतिस्तरलयिद्यु दिवाभ्रवृन्दम् ॥ ७६ ॥

**अन्वयः—**ततः रघुपतिः सावरजः विलसत्पताकं कामगतिविमानं भूयः बुधबृहस्पतियोगदृश्यः तारापतिः दोषातनं तरलविद्युत् अभ्रवृन्दम् इव अध्यास्त ।

भूय इति । ततो रघुपतिः सावरजो भरतलक्ष्मणसहितः सन् विलसत्पताकं कामेनेच्छानुसारण गतिः यस्य तद्विमानं भूयः पुनरपि बुधबृहस्पतिभ्यां योगेन दृश्यो दर्शनीयस्तारापतिश्चन्द्रो दोषाभवं दोषातनम् । “सायंचिरंप्राह्णेप्रगेऽव्ययेभ्यष्ट्युट्चुलौ तुट् च” इत्यनेन दोषाशब्दाव्ययाट्ट्युत्प्रत्ययः । तरलविद्युच्चलत्तडिदभ्रवृन्दमिव अध्यास्ताधिष्ठितवान् ।

**भावार्थ—**उसके बाद राम भी भरत और लक्ष्मण के साथ पताकाओं से सजे हुए और इच्छानुसार चलनेवाले पुष्पक विमान पर उस प्रकार चढ़ गये, जिस प्रकार बुध और बृहस्पति के साथ होने से विशेष दर्शनीय चन्द्रमा सन्ध्या के समय चञ्चल बिजली युक्त बादलों पर बैठता है ॥ ७६ ॥

तत्रेश्वररेण जगतां प्रलयादिवोर्वी
  वर्षात्ययेन रुचमभ्रघन।द्विवेन्दोः ।
रामेण मैथिलसुतां दशकण्ठकृच्छा-
  त्प्रत्युदृधृतां धृतिमतीं भरतो ववन्दे ॥ ७७ ॥

**अन्वयः—**तत्र जगताम् ईश्वरेण प्रलयात् उर्वीम् इव वर्षात्ययेन अभ्रघनात् इन्दो रुच इव रामेण दशकण्ठकृच्छ्रात् प्रत्युद्धृतां धृतिमतीं मैथिलसुतां भरतः ववन्दे ।

तत्रेति । तत्र विमाने जगतामीश्वरेणादिवराहेण प्रलयादुर्वीमिव वर्षात्ययेन शरदागमेनाभ्रघनान्मेघसङ्घातादिन्दो रुचं चन्द्रिकामिव रामेण दशकण्ठ एवं कृच्छ्रं सङ्कटं तस्मात्प्रत्युद्धृतां धृतिमतीं सन्तोषवतीं मैथिलसुतां सीतां भरतो ववन्दे ।

**भावार्थ—**जिस प्रकार आदिवराह ने प्रलय से पृथ्वी का उद्धार किया था और जिस प्रकार वर्षा ऋतु बीत जाने पर शरद् ऋतु बादलों से चन्द्रमा की