भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

पृष्ठ 683, कुल 735 में से

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६२४ रघुवंशमहाकाव्ये

से विरह कातर हो जाता था और हाथ में तूलिका लेकर किसी नर्तकी का चित्र बनाने लगता था, उस समय वह नर्तकी स्मरण हो जाती थी और सात्त्विक भाव के कारण उसकी अँगुलियो में पसीना आ जाता था और कूँची फिसल पड़ती थी इस प्रकार वह बड़ी कठिनाई से चित्र वना पाता था ॥ १९ ॥

प्रेमगर्वितविपक्षमत्सरादायताच्च मदनान्महीक्षितम् ।
निन्युरुत्सवविधिच्छलेन तं देव्य उज्झितरुषः कृतार्थताम् ॥ २० ॥

अन्वयः—प्रेमगर्वितविपक्षमत्सरात् आयतात् मदनात् देव्यः उज्झितरूपाः तं उत्सवविधिच्छलेन कृतार्थतां निन्युः ।

प्रेमेति । प्रेम्णा स्वविषयेण प्रियस्याुरागेण हेतुना गर्विते विपक्षे सपत्नजने मत्सराद्द्वैरादायतात्प्रवृद्धान्मदनाच्च हेतोर्देव्यो राज्ञ्य उज्झितरुषस्त्यक्तरुषाः सत्यस्तं महीक्षितमुत्सवविधिच्छलेन महोत्सवकर्मव्याजेन कृतोऽर्थः प्रयोजनं येन स कृतार्थः । तस्य भावस्तत्तां निन्युः । मदनमहोत्सवव्याजाच्च तेन स्वमनोरथं कारयामासुरित्यर्थः ।

भाषार्थ—यदि राजा किसी रानी से प्रेम करता तो वह गर्व से फूली नहीं समाती थी, यह देखकर उसकी सौतें जल उठती थीं और कामातुर हो जाती थीं । किसी उत्सव का बहाना करके राजा को अपने यहाँ बुलाकर उसके साथ अपनी कामना बुझाती थीं ॥ २० ॥

प्रातरेत्य परिभोगशोभिना दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः ।
प्राञ्जलिः प्रणयिनीः प्रसादयन्सोऽदुनोत्प्रणयमन्थरः पुनः ॥ २१ ॥

अन्वयः—सः प्रातः एत्य परिभोगशोभिना दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः प्रणयिनीः कृताञ्जलिः प्रसादयन् (तथापि) प्रणयमन्थरः पुनः अदुनोत् ।

प्रातरिति । सोऽग्निवर्णः प्रातरेत्यागत्य परिभोगशोभिना दर्शनेन हेतुना । “दृशेर्ण्यन्ताल्ल्युट्” कृता खण्डनव्यथा यासां तास्तथोक्ताः खण्डिता इत्यर्थः । तदुक्तम्—‘ज्ञातेऽन्यासाङ्गविकृते खण्डितेर्ष्याकषायिता’ इति । प्रणयिनीः प्राञ्जलिः प्रसादयंस्तथापि प्रणयमन्थरः प्रणयेन नर्तकीगतेन मन्थरोऽलसः, अत्र शिथिलप्रयत्नः सन्नित्यर्थः । पुनरदुनोत्पर्यतापयत् ।

भाषार्थ — रात में बाहर किसी स्त्री से संभोग करके जब राजा सुबह अपने घर लौटता था तब रात के संभोग वाले सुंदर वेश में उसे देखकर उसकी प्रेमिकायें खण्डिता नायिका के समान आंसू बहाने लगती थीं, तब वह हाथ जोड़कर

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