भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

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६३० रघुवंशमहाकाव्ये

द्विलिङ्गः । 'अक्लीबो मुष्टिमुस्तको' इति यादवः । अन्तर्गूढमन्तर्गतं गर्भं दधाना हेमसिंहासनस्थाऽव्याहताज्ञा राज्ञी मौलेर्मूले भवंमूलादागतंर्वा आप्तैरित्यर्थः । सार्धं भर्तू राज्यं विधिवद्विध्यर्हम् । यथाशास्त्रमित्यर्थः । अर्हार्थे वतिप्रत्ययः । अशिषच्छास्तिस्म । 'सर्तिशास्त्यर्तिभ्यश्च' इति च्लेरङ् । 'शास इदङ्हलोः' इतीकारः ।

इति महामहोपाध्यायकोलाचलमल्लिनाथसूरिविरचितया संजीवनीसमाख्यया व्याख्यया समेतो महाकविश्रीकालिदासकृतौ रघुवंशे महाकाव्ये अग्निवर्णशृङ्गारो नामैकोनविंशः सर्गः ॥ १९ ॥

भाषार्थ—जिस प्रकार श्रावण मास में बोये हुए मुट्ठी भर अन्न को पृथ्वी छिपाये रहती है, उसी प्रकार महारानी गर्भ धारण किये हुए थी। अस्खलित शासन वाली उस गर्भवती रानी ने विश्वासपात्र एवं मन्त्रियों की सम्मति के अनुसार विधिपूर्वक अपने पति के राज्य का काम किया ॥ ५७ ॥

श्रीकृष्णमणित्रिपाठीकृत 'चन्द्रकला' नामक हिन्दी टीका में रघुवंश का १९ वाँ सर्ग समाप्त ।

समाप्तोऽयं ग्रन्थः ।