रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
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| ६४२ | रघुवंशमहाकाव्ये |
|---|
| सर्गे | श्लोकः | सर्गे | श्लोकः | ||
|---|---|---|---|---|---|
| अथ दीक्ष्य रघुः प्रतिष्ठि | ८ | १० | अयोपरिष्टाद्भमरै | ५ | ४३ |
| अथ वेलसमासन्न | १० | ३५ | अयोपशल्ये रिपुभग्नशल्य | १६ | ३७ |
| अथ व्यवस्थापितवाक्क | १४ | ५३ | अथोरगाख्यस्य पुरस्य | ६ | ५९ |
| अथ समाववृते कुसु | ९ | २४ | अथोर्मिलोलोन्मदराज | १६ | ५४ |
| अथ स विषयव्यावृत्ता | ३ | ७० | अथोष्ट्रवामीशतवां | ५ | ३२ |
| अथ सावरजो रामः प्रा | १५ | ७० | अदः शरण्यं शरभङ्गना | १३ | ४५ |
| अथ स्तुते बन्दिभिरन्व | ६ | ८ | अदूरवर्तिनीं सिद्धि | १ | ८७ |
| अथाग्रमहिषी राज्ञः | १० | ६६ | अद्धा श्रियं पालितसंग | १३ | ६५ |
| अथाङ्गदाश्लिष्टभुजं | ६ | ५३ | अधिकं शुशुभे शुभंयु | ८ | ६ |
| अथाङ्गराजादवतार्यं | ६ | ३० | अधिगतं विधिवद्यद | ९ | २ |
| अथात्मनः शब्दगुणं | १३ | १ | अध्यास्य चाम्भःपृषतो | ६ | ५१ |
| अथाथर्वनिधेस्तस्य | १ | ५९ | अनङ्गाणां समुद्धर्तुं | ४ | ३५ |
| अथाधिकस्निग्धविलोचने | १४ | २६ | अनयत्प्रभुशक्तिसंप | ८ | १९ |
| अथाधिशिश्ये प्रयतः | ५ | २८ | अनवाप्तमवाप्तव्यं | १० | ३१ |
| अथानपोढार्गलमप्यगा | १६ | ६ | अनश्नुवानेन युगोपमा | १८ | ४८ |
| अथानाथाः प्रकृतयो | १२ | १२ | अनसूयातिसृष्टेन पुण्य | १२ | २७ |
| अथानुकूलश्रवणप्र | १४ | ४७ | अनाकृष्टस्य विषयै | १ | २३ |
| अथान्धकारं गिरि | २ | ४६ | अनिग्रहत्रासविनीत | १३ | ५० |
| अथाभिषेकं रघुवंश | १४ | ७ | अनित्याः शत्रवो वाह्या | १७ | ४९ |
| अथाभ्यर्च्य विधातारं | १ | ३५ | अनीकिनीनां समरेऽग्र | १८ | १० |
| अथार्धरात्रे स्तिमितप्र | १६ | ४ | अनुग्रहप्रत्यभिनन्दि | १४ | ७९ |
| अथास्य गोदानविधेर | ३ | ३३ | अनुभवन्नवदोलम् | ९ | ४६ |
| अथास्य रत्नग्रथितांत्त | १६ | ४३ | अनुभूय वसिष्ठसंभृतैः | ८ | ३ |
| अथेतरे सप्त रघुप्रवी | १६ | १ | अनेन कथिता राज्ञो | १० | ५३ |
| अथेप्सितं भर्तुरुर | ३ | १ | अनेन चेदिच्छसि गृह | ६ | २४ |
| अथैप्रवरेण क्रथकैशि | ५ | ३९ | अनेन पर्यासयताश्रु | ६ | २८ |
| अथैकधेनोरपरा | २ | ४९ | अनेन पाणी विधिवद्गृ | ६ | ६३ |
| अथोपनीतं विधिवद्वि | ३ | २९ | अनेन यूना सह पार्थिव | ६ | ३५ |
| अथोपयन्त्रा सदृशेन | ७ | १ | अनेन सार्धं विहराम्बु | ६ | ५७ |