रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
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श्लोकानुक्रमणिका
६५३
| श्लोक | सर्ग | श्लोकः | श्लोक | सर्ग | श्लोकः |
|---|---|---|---|---|---|
| तस्याः प्रतिद्वन्द्विभवाद्दि | ७ | ६८ | तां देवतापित्नतिथि | २ | १६ |
| तस्याः प्रकामं प्रियदर्श | ६ | ४४ | तान्हत्वा गजकुलबद्ध | ९ | ६५ |
| तस्याभवत्सूनुरुदार | १८ | १७ | तां प्रत्यभिव्यक्तमनोर | ६ | १२ |
| तस्याभिषेकसंभारं | १२ | ४ | ताभ्यस्तथाविधान्स्ना | १० | ६४ |
| तस्यामात्मानुरूपा | १ | ३३ | ताभिर्गर्भः प्रजामूत्यै | १० | ५८ |
| तस्यामेवास्य यामिन्याम् | १५ | १३ | तामग्रतस्तारमरसान्त | ६ | ३७ |
| तस्यामन्तर्हितसौधमा | १३ | ४० | तामङ्कमारोप्य कृशाङ्ग | १४ | २७ |
| तस्यालमेषा क्षुधितस्य | २ | ३९ | तामन्तिकन्यस्तबलि | २ | २४ |
| तस्यावसाने हरिदश्वधा | १८ | २३ | तामभ्यगच्छद्रुदितानु | १४ | ७० |
| तस्याः स रक्षार्थमनल्प | ७ | ३६ | तामर्पयामास च शोक | १४ | ८० |
| तस्याः स राजोपपदं | १६ | ४० | तामेकभार्यां परिवाद | १४ | ८६ |
| तस्यास्तथाविधनरेन्द्र | १९ | ५६ | तां पुण्यदर्शनां दृष्ट्वा | १ | ८६ |
| तस्याः स्पृष्टे मनुजपति | १६ | ८७ | ताम्बूलीनां दलैस्तत्र | ४ | ४२ |
| तस्यैकनागस्य कपोल | ५ | ४७ | ताम्बूलवल्लीपरिणद्ध | ६ | ६४ |
| तस्यैकस्योच्छ्रितं छत्रं | १७ | ३३ | ताम्रपर्णीसमेतस्य | ४ | ५० |
| तस्यै प्रतिश्रुत्य रघुप्र | १४ | २९ | ताम्रोदरेषु पतितं | ५ | ७० |
| तस्यै भर्तुरभिज्ञानमङ्गु | १२ | ६२ | ता राघवं दृष्टिभिरापि | ७ | १२ |
| तस्योत्सृष्टनिवासेषु | ४ | ७६ | तावत्प्रकीर्णाभिनवोप | ७ | ४ |
| तस्योदये चतुर्मूर्तेः | १० | ७३ | तावुभावपि परस्पर | ११ | ८२ |
| तस्योपकार्यारचिती | ५ | ४१ | तासां मुखैरासवगन्ध | ७ | ११ |
| तस्योधमहती मूर्ध्नि | १७ | १४ | तासु श्रिया राजपरम्प | ६ | ५ |
| तं स्वसा नागराज्यस्य | १७ | ६ | ताः स्वचारित्रमुद्दिश्य | १५ | ७३ |
| तां शिल्पिसंघाः प्रभुणा | १६ | ३८ | ताः स्वमङ्कमधिरोप्य दो | १९ | ४४ |
| तां सैव वेत्रग्रहणे | ६ | २६ | तिस्रस्त्रिलोकप्रथितेन | ७ | ३३ |
| ता इङ्गुदीस्नेहकृतप्र | १४ | ८१ | तीरस्थली बर्हिभिरुक्त | १६ | ६४ |
| तात शुद्धा समक्षं नः स्नुषा | १५ | ७२ | तीर्थे तदीये गजसेतुब | १६ | ३३ |
| ता नराधिपसुता नृपा | ११ | ५६ | तीर्थे तोयव्यतिकरभ | ८ | ९५ |
| तां तामवस्थां प्रतिपद्य | १३ | ५ | तीव्रवेगधुतमार्गवृ | ११ | १६ |
| तां दृष्टिविषये भर्तुर्मु | १५ | ७९ | ते चतुर्थसहितास्त्रयो | ११ | ५५ |