रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
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६६८ रघुवंशमहाकाव्ये
| श्लोक-प्रतीक | सर्गः | श्लोकः | श्लोक-प्रतीक | सर्गः | श्लोकः |
|---|---|---|---|---|---|
| स्तूयमानः क्षणे तस्मि | १७ | १५ | स्वासिधारापरिहृतः | १० | ४१ |
| स्तूयमानः स जिह्वाय स्तु | १७ | ७३ | स्वेदानुविद्धाद्रंनखक्ष | १६ | ४८ |
| ह | |||||
| स्थाणुदग्धवपुषस्तपो | ११ | १३ | हंसश्रेणीषु तारासु | ४ | १९ |
| स्थाने भवानेकनरा | ६ | १६ | हरैर्यथैकः पुरुषोत्त | ३ | ४९ |
| स्थाने वृता भूपतिभिः | ७ | १३ | हरेः कुमारोऽपि कुमार | ३ | ५५ |
| स्थितः स्थितामुच्चलितः | २ | ६ | हविर्भुजामेघवतां च | १३ | ४१ |
| स्थित्यै दण्डयतो दण्ड्यां | १ | १५ | हविरावर्जिते होत | १ | ६२ |
| स्नात्वा यथाकाममसो | १६ | ७३ | हविःशमीपल्लवलाज | ७ | २६ |
| स्नानाद्रंमुक्तेष्वनुधूप | १६ | ५० | हविषे दीर्घसत्रस्य | १ | ८० |
| स्निग्धगम्भीरनिर्घोष | १ | ३६ | हस्तेन हस्तं परिगृह्य | ७ | २१ |
| स्फुरत्प्रभामण्डलभानु | १४ | १४ | हा तातेति क्रन्दितमाक | ९ | ७५ |
| स्मरतेव सशब्दनूपु | ८ | ६३ | हीनान्यनुपकर्तृणि | १७ | ५८ |
| स्रगियं यदि जीवितापहा | ८ | ४६ | हुतहुताशनदीप्तिव | ९ | ४० |
| स्रष्टुर्वरतिसर्गात्तु | १० | ४२ | हृष्टापि सा ह्रीविजिता | ७ | ६९ |
| स्वप्रकीर्तितविपक्षमङ्गनाः | १९ | २२ | हृदबस्थमनासन्न | १० | १९ |
| स्वरसंस्कारवत्यासौ पुत्रा | १५ | ७६ | हेमपक्षप्रभाजालं | १० | ६१ |
| स्वर्गामिनस्तस्य तर्मै | १८ | ३६ | हेमपत्रागतं दोर्भ्यामा | १० | ५१ |
| स्वशरीरशरीरिणाव | ८ | ८९ | हैयंगवीनमादाय | १ | ४५ |
| स्वसुर्विदर्भाधिपतेस्त | ६ | ६६ | ह्रेपिता हि बहवो नरे | ११ | ४० |
| स्वाभाविकं विनीतत्वं | १० | ७९ |