भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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२० राजतरङ्गिणी अथ वैवस्वतोऽस्मिन् प्राप्ते मन्वन्तरे सुरान्। द्रुहिणोपेन्द्ररुद्रादीनवतार्य प्रजासृजा ॥ २६ ॥ २६ वैवस्वत मन्वन्तर¹ का प्रारम्भ था। सतीसर में जलोद्भव असुर निवास करता था प्रजापात कश्यप ने द्रुहिण, उपेन्द्र, रुद्र से प्रार्थना की। देवताओं के साथ जलोद्भव वध निमित्त उतरे। वूलर लेक काश्मीर उपत्यका का सबसे निचला मत्स्य पुराण विष्णु पुराण नीलमत पुराण स्थान और पूर्व सतीसर का अवशेष समुद्र की सतह १. स्वायंभुव " १. स्वायंभुव से ५१८७ फीट ऊँचा है। श्रीनगर ५२३५ फीट २. स्वारोचिष " २. स्वारोचिष समुद्र की सतह से ऊँचा है। बावन जिसके समीप ३. उत्तम, औत्तम " ३. औत्तम वामजू गुफा है वह भूमि समुद्र की सतह से ५८१६ ४. तामस " ४. तामस फीट ऊँचा है। अवन्तीपुर तथा बिज बेहरा अर्थात् ५. रैवत " ५. रैवत विजयेश्वर ५४०० फीट समुद्र की सतह से ऊँचा ६. चाक्षुष " ६. चाक्षुष है। श्रीनगर तथा अवन्तीपुर और बिज बेहरा के ७. वैवस्वत " ७. वैवस्वत बीच अनेक करेवा तथा पामपुर हैं। इस प्रकार यह ८. सावर्णि " ८. अर्क सावर्णि स्पष्ट है कि जिस समय काश्मीर उपत्यका में जल ९. दक्ष सावर्णि रुचि ९. ब्रह्म सावर्णि भरा होगा उस समय वामजू पामपुर आदि जो वूलर १०. ब्रह्म सावर्णि भौम १०. भद्राश्व (रुद्रेन) लेक की सतह से ऊँचाई पर हैं सर के तट होगी। दोनों पाठ हैं) वहाँ पर पानी का चिह्न बन जाना स्वाभाविक है। ११. धर्म सावर्णि ११. दक्ष सावर्णि १२. रुद्र पुत्र सावर्णि १२. रौच्य काश्मीर में सन् १५५२, १६८०, जून २६ १३. देव सावर्णि १३. भौत्य सन् १८२८ तथा सन् १८८५ में भयंकर भूकंप १४. इन्द्र सावर्णि आया था। सन् १८८५ के भूकंप से १३०,००० नीलमत में भूतकालीन छः तथा वर्तमान सातव वर्ग मील क्षेत्र प्रभावित हुआ था। लगभग ५०० मनु वैवस्वत का नाम मिलता है परन्तु भविष्य के वर्ग मील में तो महाभयंकर विनाश हुआ था। मनुओ के नामो में भिन्नता है • लगभग २०,००० मकान, १०,००० जानवर, कालकल्पावुभौ पूज्यौ मनवश्च चतुर्दश। ३००० मनुष्य, मर गये थे। बारहमूला में सबसे अतीताश्च भविष्याश्च तेषाम् नामानि मे शृणु ॥ भयानक असर हुआ था। वहाँ एक किला, यात्री —५६४/ ६० निवास तथा शहर के लगभग तीन चौथाई मकान स्वायंभुवो मनुः पूर्वम् मनुः स्वारोचिषस्तथा। नष्ट हो गये थे। द्यौत्तमस्तामसश्चैव रैवतश्चाक्षुषस्तथा ॥ —५६१/६९१ पादटिप्पणियाँ : वैवस्वतोऽर्कसावर्णिर्ब्रह्मसावर्ण्य एव च। २६ (१) वैवस्वत मन्वन्तर—नीलमत पुराण भद्रेश दक्ष सावर्णी रौच्य भौतस्तथैव च ॥ तथा अन्य पुराणों में वर्णित मनुओ के नाम तथा —५70/६९२ तालिका में अंतर है— संपूजनीया देवेन्द्रस्तथा मन्वन्तरानुदश। —571/६९३