भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 397

५६२ राजतरंगिणी अथ म्लेच्छगणाकीर्ण मण्डले चण्डचेष्टितः । तस्याऽऽत्मजोऽभून्मिहिरकुलः कालोपमो नृपः ॥ २८९ ॥ मिहिरकुल : २८९. म्लेच्छ' गणों से मण्डल आकीर्ण होने पर उसका सदृश चण्डचेष्टा, काल सदृश मिहिरकुल राजा हुआ ।

से पादशाहत करके दुनिया से रुखसत हुआ । (२) हिरण्योत्स : इस स्थान का पता नहीं चलता । (३) वसुकुल : आइने अकबरी में नाम 'इद्रि- २५९' तथा उसका राज्यकाल ६० वर्ष दिया गया है। हसन कहता है - राजा 'वमः कुल' राजा हिरण्यकुल का बेटा था। इसने भी साठ साल हुकूमत किया । लौकिक वर्ष २३१२ में कश्मीर के राज्य सिंहासन पर बैठा होगा । २८९ (१) म्लेच्छ : पाँचवी शताब्दी के प्रयोग में भामू दरया के उपत्यका के हूण जुअन जाति से मुक्ति पाकर शक्तिशाली हो गये । शासकों के वंश के कारण येथा-इफथलाइट कहे जाने लगे । यूनानियों ने इन्हे श्वेत हूण कहा है। यही शब्द आज प्रचलित है। यहाँ म्लेच्छ शब्द से इफथे- लाइट हूणो से तात्पर्य है। इन हूणों ने भामू दरया के समीपवर्ती प्रदेशो पर अपना राज्य स्थापित किया था। यूनानी बौद्ध सभ्यता का अफगानिस्तान मे नाश किया । उत्तरी भारत में राज्य विस्तार कर स्यालकोट का अपनी राजधानी बनाया। भागवत पुराण के अनुसार हूणो पर भरत ने अपनी दिग्विजय यात्रा मे विजय प्राप्त की थी । (भागवत ९. २० : ३०) । मत्स्य पुराण में १९ हूणो का वर्णन मिलता है। (मत्स्यपुराण २७२ : ९) हसन लिखता है- 'राजा मिहिरकुल राजा वसुकुल का बेटा था। क० २३३६ में हकूमत का झण्डा बुलन्द किया। खुदा का खोफ न होने घोर बेरहमी और गजबनाकी में बेमिसाल था। थोड़े जुर्म पर कतल करने से गुरेज नहीं करता था। किसी दिन भी खून रेजी के वगैर चैन न लेता ।

रहम करने के नाम व निशान का उसको शक न था। परिन्दे और चरिन्दे मक्तूलो गोश्त की उम्मीद में उसके साथ-साथ र करते थे । उसके जमाने में तुरकिस्तान के हाकिम ने कश्मीर पर हमला कर दिया । र ने इन्तहाई जवाँ मरदी, बहादुरी और हिम्मत के साथ उसके हमला का मुँहतोड़ जवाब द जिसके नतीना में बहुत से सिपाही मक्तूल जख्मी हुए । बित आखोर शिकस्त खाकर गया । चन्दरकुल नाम की एक नहर पर शादिर पारा में खुदवायी। दौरान खुदवाई मौह आगर व अगर के पुस्ता में एक बड़ा स पत्थर खदराहु हो गया और किसी भी तद भोर हीला से अपनी जगह से न हिला। देखकर राजा को सख्त फिक्र हुई। पूजा के बाद ख्वाब मे एक आदमी देखा। जो उ कह रहा था कि हर वह औरत जो गुनाह कारी से पाक व साफ होगी जब इस पत्थर हाथ रखेगी तो वह फौरन नाबूद हो जाय राजा ने इसी इलहाम के बमूजिब हर त औरतों की जमायतों को अरूड़ करवाया। ले किसी एक के भी हाथ लगने से वह प अपनी जगह से न हिला । राजा निहायत नाक हुआ और औरतों को जिनारकारी और व की हरामजदगी और मरदो का बेबस और बेई के बहाने से कतल आम कर दिया। कैफियत -'मोरखों ने औरत, बच्चे और मक्तूलीन की तादाद तीन करोड़ लिखी है ले बाज तीन लाख तक खायल करते हैं। 'आखिरकार चन्द्रवती जो एक कुम्हार लड़की थी हाजिर हुई। उसने राजा को बड़े ग