भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 479

३५२ राजतरंगिणी भूत्वा षट्त्रिंशतं वर्षान् शतं चाह्नां विभुर्भूवः । स दीर्घैरनघैर्लोकानासदत्सुकृतैः कृती ॥ ३४६ ॥ ३४९. उस पुण्यात्मा ने छत्तीस वर्ष सौ दिन पृथ्वी का स्वामी रहकर अत्यधिक सुकृतों के कारण पुण्य लोक प्राप्त किया। युधिष्ठिराभिधानोऽभूदथ राजा तदात्मजः । यः सूक्ष्माक्षतया लोकैः कथितोऽन्ध्ययुधिष्ठिरः ॥ ३५० ॥ युधिष्ठिर : ३५०. अनन्तर युधिष्ठिर नामक उसका पुत्र राजा हुआ, जिसे सूक्ष्माक्ष होने के कारण, लोग अन्ध युधिष्ठिर कहते थे १ । तक नहीं मिल सका है। सम्भव है कल्हण के समय तक इनके विषय में कुछ साहित्य प्राप्त रहा हो। कल्हण ने स्वयं इनका इतना संक्षिप्त वर्णन किया है कि कुछ अनुमान लगाना कठिन है। (२) उग्रेश : ऋग्वेद में 'उग्रदेव' का उल्लेख मिलता है। (ऋ० १:३६ : १८; पं०ब्रा. १४: ३ : १७; २३:१६ · ११७) इनका पैतृक नाम तैत्तिरीय आरण्यक में राजनि दिया गया है। (तै०- आ०; ५.४-१२) यहाँ पर सरल अर्थ यही अभिप्रेत है कि उग्र ने अपने नाम पर उग्रेश शिव की स्थापना की। (३) मातृ चक्र : टिप्पणी मातृचक्र पृष्ठ १८१ ( १ २२ ) द्रष्टव्य है। पाठभेद : श्लोक संख्या ३४६ में 'शतं' का 'शति' पाठभेद मिलता है। श्लोक संख्या ३५० में 'सूक्ष्माक्षतया' का पाठभेद 'सूक्ष्माक्षितया' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ३५० (१) आइने अकबरी में 'जेवादिस्तर' लिखा है। राज्य काल ४८ वर्ष १० दिन दिया गया है। राजतरंगिणी में इस राजा का राज्य काल नहीं दिया गया है। आइने अकबरी में युधिष्ठिर के शासन के विषय में लिखा है-राजा युधिष्ठिर ने न्यायपूर्ण शासन आरम्भ किया। किन्तु कालान्तर में वह कामी हो गया, वह इतना क्रूर हो गया था कि हिन्दुस्तान तथा तिब्बत के राजाओ ने उसके खिलाफ मिलकर आवाज उठायी। इससे उत्साहित होकर कश्मीर के सरदारों ने विद्रोह किया। राजा को बन्दी-गृह में डाल दिया। श्री स्टीन इस राजा का राज्याभिषेक लौकिक वर्ष २९६१ वर्ष आठवा मास उनतीसवाँ दिन मानते हैं। प्रो एस. पी. पण्डित यह समय ईसा पूर्व २१७ वर्ष देते हैं। हसन के अनुसार 'क. २८२८ में उसका (नरेन्द्रा- दित्य का) बेटा राजा अन्ध युधिष्ठिर बाप का जानशीन हुआ। उसकी आँखें बड़ी छोटी थी। यही वजह था कि यह बीनाई पूरी नहीं रखता था। इस बिना पर इसे लोगों ने अन्ध यानी कोर का लकब दिया हुआ था। शुरू-शुरू में अदल व इन्साफ सखावत व रैयत परवरी में मसरूफ रहा। लेकिन बिल आखिर कमीनों और बदकारों की सुहबत में पड़कर जुल्म और सख्ती का पेशा अख्तियार कर लिया। हर किस्म के बुरे काम मसलन शराबनोशी और बदकारी अपना शभार बना लिया। लोगों की औरतें और बीवियां जबर्दस्ती ले जाने लगा। अकलमन्दों और सन रसीदा लोगों से नफरत अख्तियार करके कमीनों और भा- वारों को अपना मुसाहब बना लिया। बेरहमी और खूँरेजी में कोई कसर बाकी न रखी। यह देखकर