भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 604

अथ तृतीयस्तरङ्गः मुञ्चेभाजिनमस्य कुम्भकुहरे मुक्ताः कुचाग्रोचिताः किं भालज्वलनेन कज्जलमतः स्वीकार्यमक्ष्णोः कृते । संधाने वपुरर्धयोः प्रतिवदन्नेवं निषेधेऽप्यहेः कर्तव्ये प्रियोत्तरानुसरणोद्युक्तो हरः पातु वः ॥ १ ॥ १. 'गज चर्म त्याग दे' इसके कुम्भ कुहर में (तुम्हारे) कुचाग्रोचित मुक्ता होते हैं,' 'भालस्थ' ज्वलन (अग्नि) से क्या लाभ ?" 'इससे नेत्रों के लिये कज्जल प्राप्त होते हैं।' अर्धाङ्ग विषयक प्रश्न का उत्तर देकर, इसी प्रकार प्रिया के अहि का निषेध करने पर, उत्तर अन्वेषण में उद्यत, शिव आप लोगों की रक्षा करें।' अथोल्लसत्पृथुश्लाघमानिन्युर्मेघवाहनम् । गान्धारविषयं गत्वा सचिवाधिष्ठिताः प्रजाः ॥ २ ॥ मेघवाहन१ २. मन्त्रियों के नियन्त्रण में प्रजा गान्धार देश२ जाकर, मेघवाहन को ले आयी, जिसकी प्रचुर प्रशस्ति फैल रही थी । पाठभेद : (१) २ श्री विलसन मेघवाहन का अभिषेक 'श्री गणेशाय नमः' से भी तरंग का आरम्भ काल सन् २३ ई० ३ मास तथा राज्य काल ३४ होता है । वर्ष देते है । पादटिप्पणियाँ : श्री एस पी. पण्डित यह समय सन् २४ ई० (१) राजतरंगिणी सूक्ति संग्रह का यह ५३ वाँ तथा राज्यकाल ३४ वर्ष देते हैं। श्लोक है। उक्त पद का भावार्थ निम्नलिखित होगा । थोस्तोन अभिषेक काल लौकिक संवत् ३०८८ देहार्ध द्वय मिलन समय पार्वती ने जिज्ञासा की तथा राज्यकाल ३४ वर्ष देते हैं । 'गजाजिन परित्याग कर दीजिये ।' महादेव ने श्री वाली ने यह काल सप्तर्षि संवत् ३९७९ उत्तर दिया-'इसके कुम्भ के मध्य में तुम्हारे तथा सन् २०६ ई० देते हैं। पयोधर भूषण के उपयुक्त मुक्ता राशि निहित है। अबुल फजल आइने अकबरी में मेघवाहन का पार्वती ने पुनर्जिज्ञासा की-ललाट स्थित अनल नाम मगदहन देता है । का प्रयोजन क्या है ? महादेव ने उत्तर दिया- ट्रापर यह समय सन् २४ ईस्वी तथा ९ मास 'वहाँ से तुम्हारा लोचन भूषण कज्जल प्राप्त होगा।' देते हैं। कनिघम यह समय सन् ३८३ ई. मानते हैं। इस प्रकार प्रत्युत्तर देकर प्रियतमा के सर्प निषेध हसन लिखता है-'राजा मेघवाहन राजा सूचक प्रश्न के चिन्तन अनुसरण उद्यत हर आप अरीराय (सन्धिमत) के इस्तीफा देने के बाद लोगो की रक्षा करें । संवत् ३४ में तुरन्त सल्तनत पर अलवागर ५८