भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 76

कश्मीर का इतिहास अथ श्रीकल्हणकृतायां राजतरङ्गिण्याम् प्रथमस्तरङ्गः श्रीगणेशाय नमः १ भूषाभोगिफणारत्नरोचिस्सिचयचारवे । मङ्गलाचरण नमः प्रलीनमुक्ताय हरकल्पमहीरुहे ॥ १ ॥ १. उन भगवान् शिव२ को नमस्कार है जो सर्पों के आभूषण से आभूषित हैं; जिनका शरीर सर्पों के फणों में स्थित रत्नों की दीप्ति द्वारा प्रदीप्त है। जो कल्पतरु स्वरूप हैं, और जिनमें मुक्त जन प्रलीन ३ होते हैं। पाठ भेदः जाता है, तो उसका अर्थ पवित्र किंवा शुभ श्रीगणेशाय नमः ; ओं श्रीकृष्णाय नमः ; ओं सौभाग्यशाली, भाग्यवान्, पूजनीय तथा महाभाग सरस्वत्यै; आं श्रीगणेशाय नम. ; ओ नमोः समझा जाता है । नारायणाय ; ओम् , ओं भगवते वासुदेवाय; !' ओं स्वस्ति ; अथ राजतरंगिणी आदि पाठों का भेद मिलता है । गणेश के नाम आदि की विस्तृत व्याख्या गणेश पुराण स्वयं करता है । वेद में गणपति वाराणसी, पूना, इण्डिया आफिस लाइब्रेरी शब्द मिलता है 'गणाना त्वा गणपति'—ऋग्वेद तथा श्रीनगर की पाण्डुलिपियों में श्रीगणेशाय नम. २:२३:१ । गणपति किंवा गणेश शब्द का अर्थ मिलता है । गणों का अध्यक्ष अथवा लोकतंत्र का राष्ट्रपति प्रथम श्लोक के शब्द 'भूषाभोगि' का पाठ- लगाया जाता है । भारत गणतंत्र है । गण का भेद 'भूषाहीन', 'मुक्ताय' का 'मुकुटा' तथा 'हर' पति अथवा राजा, गणपति, गणेश, शाब्दिक का 'पुरा' मिलता है । अर्थ से ठीक है । प्राचीन काल से गण राज्यों के अधिपति को गणेश किंवा गणपति कहते थे । पादटिप्पणियाँ : भारत में प्रचलित राष्ट्रपति शब्द में गणपति किंवा १. (१) श्री गणेशाय नमः--कल्हण सनातन गणेश का भाव आ जाता है । गणेश का नाम काव्य रचना एवं कवि परंपरा का अनुकरण करता ज्येष्ठराज भी है । महाभारत लिखने के समय हुआ, राजतरंगिणी का प्रारंभ 'श्री गणेशाय नमः' व्यास ने गणेश को अपना लिपिक बनाया था । से करता है। श्री शब्द जब नाम के साथ लगाया