भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 967

१५० राजतरंगिणी स मातॄगुप्तस्वाम्याख्यं 3, 263 सागरीशेऽपि न शुष्यन्ति 1, 139 समातृचक्रं निर्माय 3, 99 साध्वी स्पृशति चेदेनां 1, 320 समीरणसमीकीर्ण° 2, 86 सा निश्यदर्शनाभ्याग° 3, 497 स मेघवननामानम् 3, 8 सानुगे नृपती याते 3, 471 संबन्धाऽयोग्पमपि तं 1, 243 सान्निध्यं यस्य संशान्तः 1, 291 संभावनानुसारेण 3, 136 सा बद्धाप्रतिमं सिद्धं 3, 459 संभाव्य सत्त्वावष्टम्भात् 3, 117 सा भूतिविभ्रमोदग्र° 2, 55 संविभेजेऽनुजग्राह 3, 113 साम्राज्योच्छोः समागेन 3, 272 संस्तम्भ्याम्भः प्रविष्टेन 1, 111 सा यत्र शुचिचारित्रा 2, 57 सयत्नं तव कर्तुं तत् 3, 269 सा योजनाधिके दोषे 1, 264 स युवा पितुरादेशाद् 2, 147 सार्धं तपोपर्नस्तैः 2, 141 सरलस्यन्दसुभगा 3, 226 सा स चान्योग्यमुग्गन्भू 3, 119 सरला सरणि त्यक्त्वा 3, 399 साहायकार्यामाहूतो 1, 59 स राजोचितनेपथ्यः 2, 119 धिद्धः सिद्धः संदेहोऽयम् 1, 285 स रुद्ववमुखवाग्म्लेच्छात् 1, 115 सिंहलेषु नरेन्द्राइङ्घ्रि° 1, 295 सर्वत्र समदृष्टित्वं 1, 355 सिंहासनं स्ववंद्याना 3, 331 सर्वदोषोज्झितं सैन्यं 3, 143 सुप्तसुप्तेषु सर्वेषु 3, 174 सर्वरत्नजयस्कन्द° 3, 380 सुखार्थी नागरिप्रतिभय° 3, 215 सर्वः स्मरति सर्वस्य 3, 311 सुतासंतानसाम्राज्यम् 3, 487 सर्वोपायैरसाध्यां च 1, 255 सुतो महीमहेन्द्रस्य 2, 63 स वयश्शङ्कुपुच्छाना 3, 396 मूदे दामोदरीये यत् 1, 157 स वर्षसप्ततिं भुक्त्वा 1, 309 सूनुर्नरेन्द्रादित्योऽस्य 1, 347 स विक्रमप्रभावाभ्या 1, 121 सेयं वितस्ता दृष्ट्वैना 1, 164 स विधायाधिकरणं 3, 385 सेवया दृष्टकष्टस्य 3, 138 स विलङ्घ्यतगव्यूतिः 2, 163 सोऽचिन्तयदहो कष्ट. 3, 513 सविहारस्य निर्माता 1, 169 सोऽजायत रणादित्यो 3, 431 स वृत्तप्रत्यभिज्ञः सन् 3, 457 सोऽथ भूभृज्जलौकोऽभूद् 1, 108 स शापितोऽस्मेद्देहेन 3, 208 सोऽपश्यत्सुरतक्लान्ति° 3, 507 स श्मशानभुवं प्रायाद् 2, 84 सोऽयं त्रिकोटिहा मुक्तो 1, 310 सप्तदिना वर्षयष्टि 1, 345 सोऽयमासादितः पुण्यैः 3, 131 स पश्यंत्या गेहाना 1, 104 सोष्मस्नानगृहाः शीते 1, 40 स सत्त्वैहिमाविरतः 1, 133 स्तनयुगतलमग्नस्रस्त° 1, 372 स सिंहलेन्द्रेण समं 1, 297 स्तोकावशेषप्राणं तं 3, 410 स हठात्पतितां लक्ष्मी 3, 322 स्त्रीति नामेन्द्रियार्थोऽयम् 3, 514 स हि कारयितुं यक्षीः 1, 159 स्थाने स्थाने जलान्तश्च 2, 131 स हेमन्तानिलैर्भूरि° 3, 172 स्नातस्य निर्झराम्भोभिः 2, 137