राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाधना के प्राथमिक सोपान ३१
जिस प्रकार की शक्ति की आवश्यकता है, उसकी पूर्ति कर रहा है और उस शक्ति को नियमित कर रहा है।
एक राजा के एक मन्त्री था। किसी कारण से राजा उस पर नाराज हो गया। राजा ने उसे एक बडी ऊँची मीनार की चोटी मे कैद कर रखने की आज्ञा दी। राजा की आज्ञा का पालन किया गया। मन्त्री भी वहाँ कैद होकर मौत की राह देखने लगा। मन्त्री के एक पतिव्रता पत्नी थी। रात को उस मीनार के नीचे आकर उसने चोटी पर कैद हुए पति को पुकारकर पूछा, "मे किस प्रकार तुम्हारी रक्षा करूँ?" मन्त्री ने कहा, "अगली रात को एक लम्बा मोटा रस्सा, मजबूत डोरी, एक बडल सूत, रेशम का पतला सूत, एक गुबरैला और थोडा सा शहद लेती आना।" उसकी सहधर्मिणी पति की यह बात सुनकर बहुत आश्चर्यचकित हो गई। जो हो, वह पति की आज्ञानुसार दूसरे दिन सब वस्तुएँ ले गई। मन्त्री ने उससे कहा, "रेशम का सूत मजबूती से गुबरैले के पैर मे बाँध दो, उसकी मूँछो में एक बूंद शहद लगा दो और उसका सिर ऊपर की ओर करके उसे मीनार की दीवार पर छोड़ दो।" पतिव्रता ने सब आज्ञाओ का पालन किया। तब उस कीडे ने अपना लम्बा रास्ता पार करना शुरू किया। सामने शहद की महक पाकर मधु के लोभ से वह धीरे-धीरे ऊपर चढने लगा, और अन्त मे मीनार की चोटी पर जा पहुँचा। मन्त्री ने झट उसे पकड लिया और उसके साथ रेशम के सूत को भी। इसके बाद अपनी स्त्री से कहा, "बडल मे जो सूत है, उसे रेशम के सूत के छोर से बाँध दो।" इस तरह वह भी उसके हाथ मे आ गया। इसी उपाय से उसने डोरा और मोटा रस्सा भी पकड लिया। अब कोई कठिन काम न रह