राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४ ) तीसरा अध्याय महारावत क्षेमकर्ण से विक्रमसिंह ( बीका ) तक विषय पृष्ठाङ्क क्षेमकर्ण से पूर्व के गुहिलवंशी नरेश ... ... ४३ क्षेमकर्ण ( क्षेमसिंह ) ... ... ... ४७ क्षेमकर्ण का जन्म ... ... ... ४७ महाराणा कुंभकर्ण और क्षेमकर्ण के बीच विरोध होना ४७ क्षेमकर्ण का मालवे के सुलतान के पास जाना ... ४८ क्षेमकर्ण का मेवाड़ पर मालवे के सुलतान को चढ़ा लाना ४६ खानसलह के अनुचर बहरी से क्षेमकर्ण का युद्ध ... ५० क्षेमकर्ण की मृत्यु ... ... ... ५१ क्षेमकर्ण की संतति ... ... ... ५३ क्षेमकर्ण का व्यक्तित्व ... ... ५३ सूरजमल ... ... ... ५४ सादड़ी का स्वामी होना ... ... ५४ रायमल का सारंगदेव को भैंसरोड़गढ़ की जागीर देना ५५ मालवे की सेना के साथ महाराणा के पक्ष में सूरजमल का युद्ध करना ... ... ५५ महाराणा के कुंवरों में पारस्परिक द्वेष की वृद्धि ... ५८ सारंगदेव का सूरजमल के पास जाकर रहना ... ६१ सूरजमल का मालवे की सेना के साथ जाकर महाराणा से युद्ध करना ... ... ६२ सूरजमल का मेवाड़ छोड़ना ... ... ६७ सूरजमल का देहान्त ... ... ७१ सूरजमल की राणियां और संतति ... ... ७१ सूरजमल का व्यक्तित्व ... ... ७३