भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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भूगोल सम्बन्धी वर्णनः २७ बनवाया हुआ है, जिसमें वि० सं० १८२६ शक सं० १६६४ ज्येष्ठ वदि ५ (ई० स० १७७२ ता० २१ मई) गुरुवार का शिलालेख है। इस मंदिर का द्वार तथा स्तंभों के सिरे शेवना से लाकर लगाये गये हैं। गांव के बाहर पाषाण का बना हुआ एक छोटासा शिव-मंदिर तथा पद्मावती (देवी) का मंदिर है, जिनको वहां के नागर ब्राह्मणों ने बनवाया था। तालाब की पाल पर का शिव-मंदिर वि० सं० १८१६ (ई० स० १७६२) में महारावत सालिम- सिंह के समय नागर ब्राह्मण हरनाथ ने बनवाया था । गांव के आस-पास दूर-दूर तक पुरानी ईंटें निकलती हैं। पहले यहां विसनगरे नागरों की अच्छी बस्ती थी, परन्तु अब केवल १०-१५ घर रहे हैं। शेवना—प्रतापगढ़ से दक्षिण में लगभग २० मील की दूरी पर शेवना नामक गांव है, जो पहले संपन्न था । यह प्रसिद्ध है कि यहां शिवनगरी नामक राज्य की राजधानी थी । इसमें कितनी सत्यता है, यह कहा नहीं जा सकता, परन्तु इतना निश्चित है कि पहले यह नगर विशाल रहा होगा, क्योंकि इसके खंडहर दूर-दूर तक दृष्टिगोचर होते हैं । एक क़िले के अतिरिक्त यहां पर अब तक कई मंदिरों के भग्नावशेष विद्यमान हैं, जिनमें एक शिवालय बहुत सुन्दर है। यहां ज़मीन के भीतर बना हुआ महाकाल का पुराना मंदिर है। कई मूर्तियां इधर-उधर टूटी-फूटी दशा में मिलती हैं, जिनमें से त्रिविक्रम (वामन) की मूर्ति राजपूताना म्यूज़ियम् अजमेर में सुरक्षित है¹। यहां से कई मंदिरों के द्वार, स्तम्भ आदि लेजाकर अचूंडला, नीनोर आदि के मंदिर बनाये गये हैं। अब तो इसके आस-पास थोड़ीसी भीलों (मीणों) की बस्ती रह गई है। उपर्युक्त स्थानों के अतिरिक्त इस राज्य में बोरदिया, धमोतर, बमोतर, गयासपुर, सुहागपुर, बसाड़ आदि और भी कई प्राचीन स्थान हैं । उनमें से कई में मंदिरों आदि के चिन्ह पाये जाते हैं। गयासपुर मालवे के सुलतान गयासुद्दीन के नाम पर बसा हुआ है, जो पहले (१) राजपूताना म्यूज़ियम् (अजमेर) की ई० स० १६२२-२३ की रिपोर्ट; पृ० ५ ।