भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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१०४ रामायणमीमांसा पञ्चम किया था। मेरी दूसरी माता सुमित्रा वैश्य जाति की थी और मेरी तीसरी माता ( कैकेयी ) शूद्र जाति की थी । तीनों को महिषी, वावाता और परिवृत्ति कहा जाता था ।” पाठकों को मालूम होना चाहिये कि यह कथन वाल्मीकिवर्णित मर्यादा पुरुषोत्तम राम के सम्बन्ध का नहीं है । यह तो मिथ्या वासुदेव के समान मिथ्या काल्पनिक, नास्तिक बौद्ध राम का या आनन्द कौसल्यायन का ही कथन है । वास्तविक राम ने कभी अपनी कहानी नहीं लिखी है। जैसे मिथ्या वासुदेव पौण्ड्रक नकली दो भुजाएँ तथा नकली गरुड़ बनाकर वासुदेव बन गया था, वैसे ही कौसल्यायन नकली मनगढ़न्त कहानी बनाकर नकली बौद्ध नास्तिक राम बन गये हैं। अश्वमेध की इष्टि के याजक महर्षि वसिष्ठ कोई अन्य नहीं । पुत्रेष्टि के याजक ऋष्यशृङ्ग नहीं ऋष्यशृङ्ग थे । वे महात्मा बालब्रह्मचारी थे । वेश्याएँ नहीं, दिव्य अप्सराएँ उन्हें तपोवन से लायी थीं । वे अपने को ऋषि बताकर उनको रोमपाद के राज्य में अनावृष्टि दूर करने के लिए लाने में समर्थ हो गयीं । राजा ने उनके पिता की