झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२८ झांसी की रानी 'मैं कसम खाता हूं मैकाले ने 'छोटी सी' अलमारी नही कहा है। मै कहता हूँ, कि इनकी अच्छी पुस्तके अलमारी के एक ही कोने में आ सकती हैं।' 'जाने दो, इनकी नर्तकिया अवश्य कभी कभी परियो सी जान पड़ती हैं।' 'जब वे ढेरो जेबर लादकर सामने आती हैं तब जान पडता है मानो फूलो में जुगनू जड दी हो।' 'कभी कभी नाच के कुछ कदम भले लगते हैं।' 'लेकिन गाना बिलकुल चीख चिल्लाहट। हा सारगी का बाजा मीठा लगता है और जब तबला धीमी लय मे बजता है तब नाच उठने को जी चाहने लगता है।' 'हिन्दुस्थान का जलवायु,,प्रकृति, अनाज, दूध सब अच्छा, लेकिन देश कुसंस्कारो से भरा हुआ है । किसान बहुत मिहनती नही हैं ।' 'और चोर डाकुओ के मारे चन नही ले पाते हैं।' 'हम लोग हिन्दुस्थान में उन्ही का नाश करने के लिये तो मौजूद हैं।' 'रियासतो में बडा अन्धेर, बडा अत्याचार होता है।' 'सुनता हूँ किसी रियासत में एक इत्रफरोश गया। एक सरदार ने छत्तीस हजार रुपये का इत्र खरीद डाला। जब इत्रफरोश ने कहा कि अभी मेरे पास बेचे हुये इत्र से भी बढ़िया और मौजूद है, तब उस सरदार ने वह सब खरीदा हुआ इत्र अपनी घुडसाल के घोड़ो की पूंछो पर उडेल दिया और कहा यह इत्र तो हमारे लायक नही। घोडो की पूंछ की बू जरूर इसमे दूर हो जावेगी, और तुम्हारा जो इससे बढ़िया इत्र है, वह यदि बेचो तो गधेरो के गधो की पूंछ पर छिड़कवा दूंगा। जब राजा के पास यह समाचार पहुचा तब उसने सरदार को शाबाशी दी और खजाने से छत्तीस के दुगुने बहत्तर हजार रुपया सरदार के पास भेज दिये ।' 'यह झांसी के राजा का ही किस्सा है।'