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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई १३१ प्यालो का दौर और अखण्ड साम्राज्य की कल्पना, अनेक अवसरो की तरह, क्लब में लगभग उफान पर आ रही थी कि क्लब के बाहर तेज़ी से दौडकर आने वाले घुड सवारो की आहट सुनाई पडी । पहरे वाले ने सलाम किया और कहा, 'हुजूर, राजा के यहां से खबर आई है कि वे बेहोश पडे हैं।' सबने अपने अपने प्याले रख दिये । सतर्क हो गये । एक दूसरे की ओर देखने लगे । एलिस ने कहा, 'सूचना दो कि मै थोडी देर में आता हूँ।' पहरे वाला चला गया । मार्टिन ने एलिस से पूछा, 'राजा मरने वाला है या शायद मर भी गया हो । हिन्दुस्थानी लोग असल बात को देर तक छिपाये रखने के अभ्यासी होते हैं। यदि राजा मर भी गया हो तो क्या वह गोद स्वीकार करली जावेगी ? मेरे ख्याल में लार्ड डलहौजी झासी को अङ्गरेज़ी इलाके में मिला लेगे ।' 'हिश !' एलिस ने उँगली से वर्जित कर के कहा, 'कुछ ज्यादा पी गये हो मालूम होता है।' उसी क्षण और घुडसंवार आये। पहरे वाला भीतर आया । बोला, 'हुजूर' अब महल से दूसरा समाचार यह आया है कि महाराज अच्छे हैं और हुजूर को तुरन्त बुलाया है।' 'डैम इट ।' धीरे से मार्टिन के मुंह से निकल पडा । पहरेदार ने सुन लिया । सिर नवाकर बाहर चला गया । उसके कलेजे में कुछ कसक गया। एलिस ने आंखे तरेरी । मार्टिन ने अगूठा दिखाकर उपेक्षा की । कहा, 'हमारा नौकर है। राजा का नौकर नही ।' एलिस डाक्टर एलन को साथ लेकर राजमहल चला गया । गङ्गाधरराव को रनवास के कक्ष मे पहुँचा दिया गया था । जब एलिस और एलन पहुंचे राजा होश में थे । एलिस को देखकर 'वे प्रसन्न हुये । बोलने की चेष्टा की । टूटे टूटे बोले ।